
National Herald Case: नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल को फिर बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट ने ED की याचिका पर नोटिस से बढ़ी टेंशन
National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस लीडर को एक बार फिर कानून का तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित 7 आरोपियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस आदेश के खिलाफ जारी किया गया है, जिसमें राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया था।
National Herald Case: क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत एक निजी शिकायत से हुई थी, जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में दाखिल किया था। (National Herald Case) आरोप है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों पर यंग इंडिया लिमिटेड के जरिए कथित रूप से अवैध तरीके से कब्जा जमाया गया। इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
ED अब तक इस मामले में कई सौ करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुकी है और आरोपियों से लंबी पूछताछ भी हो चुकी है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन जांच प्रक्रिया निरंतर जारी है।
राउज एवेन्यू कोर्ट का विवादित फैसला
हाल ही में राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह कहते हुए ED की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से साफ़ मना कर दिया था कि यह मामला किसी सरकारी FIR पर आधारित नहीं है, बल्कि एक निजी शिकायत से जुड़ा है। (National Herald Case) कोर्ट का मानना था कि PMLA के अंतर्गत मनी लॉन्ड्रिंग केस तभी आगे बढ़ सकता है, जब किसी निर्धारित अपराध में FIR दर्ज हो। अब इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताते हुए केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला और पूरे देश में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
ED की दलील और हाई कोर्ट का रुख
राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए ED दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची। ED की तरफ़ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि निचली अदालत ने कानून की गलत व्याख्या की है। उन्होंने कहा कि जब किसी सक्षम अदालत ने निजी शिकायत पर संज्ञान लिया है, तो वह एक साधारण FIR से कहीं ज़्यादा मजबूत कानूनी आधार रखता है।
तुषार मेहता ने कोर्ट से सवाल किया कि यदि अदालत के आदेश से जांच आगे बढ़ती है, तो फिर FIR को ही एकमात्र आधार मानना कानून की भावना के खिलाफ है। (National Herald Case) हाई कोर्ट ने इस दलील को बेहद गंभीरता से लेते हुए मामले में नोटिस जारी करने का फैसला किया।
क्या कहा गया गांधी परिवार की तरफ़ से?
गांधी परिवार की तरफ़ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था और ED कानून की सीमाओं का उल्लंघन कर रही है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस स्तर पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचे बिना सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कितने लोगों को नोटिस?
बता दे, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कुल 7 आरोपियों को नोटिस जारी किया है। सभी को ED की याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
हाई कोर्ट के इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में ज़ोरदार हलचल मच गई है। (National Herald Case) जहां बीजेपी इसे ‘कानून की जीत’ बता रही है, तो वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह मामला अब भी राजनीति से प्रेरित है। राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिलने के बाद कांग्रेस जिस फैसले को अपनी जीत के तौर पर देख रही थी, उस पर अब सवाल खड़े होना शुरू हो गए हैं।
आगे क्या होगा ?
अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में विस्तृत सुनवाई के लिए जाएगा। (National Herald Case) अगर हाई कोर्ट ED की याचिका स्वीकार कर लेता है, तो ट्रायल कोर्ट को फिर से चार्जशीट पर संज्ञान लेना पड़ सकता है। इसके बाद मामला फिर से लंबी न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश करेगा, जिसमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बता दे, नेशनल हेराल्ड केस एक बार फिर साबित करता है कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बहुत ही संवेदनशील मामला है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला आखिरी नहीं था। (National Herald Case) अब सबकी नजरें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हुई हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा तय करेगा।
