Rule 267 Rajya Sabha: NEET और प्रदर्शनकारियों के मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा की मांग, खरगे-संजय सिंह का नोटिस

Rule 267 Rajya Sabha: NEET और प्रदर्शनकारियों के मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा की मांग, खरगे-संजय सिंह का नोटिस

Rule 267 Rajya Sabha: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को राज्यसभा में चेयर से नियम 267 के तहत नोटिस स्वीकार करने का आग्रह किया। विपक्ष के नेताओं ने ज़ोर दिया कि सदन बिना किसी देरी के NEET विवाद और प्रदर्शन कारियों पर पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई को लेकर इस नियम के तहत चर्चा करे। इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सभापति को नियम 267 (Rule 267) के तहत चर्चा के लिए नोटिस दिया और मांग की कि सरकार को तत्काल नीट (NEET), सोनम वांगचुक की गिरती सेहत और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सदन में व्यापक चर्चा करे।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि CJP प्रोटेस्ट और छात्रों के हित से जुड़े मुद्दों को लेकर पूरा विपक्ष चाहता है कि राज्यसभा के नियम 267 के तहत चर्चा हो। लेकिन अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे में यह जानना जरूरी हो गया है कि नियम 267 क्या है? विपक्ष इस पर क्यों अड़ा है? और सरकार इससे क्यों बचती नजर आ रही रही है?

क्या है नियम 267?

राज्यसभा के नियम 267 (Rule 267) के तहत कोई भी सांसद सदन की पहले से तय कार्यवाही को स्थगित कर किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तत्काल जनहित के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग कर सकता है। यह नियम विपक्ष के लिए सरकार को गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर जवाब देने के लिए मजबूर करने का एक महत्वपूर्ण संसदीय माध्यम माना जाता है।

1. नोटिस देना

कोई भी राज्यसभा सांसद सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सभापति (Chairman) को लिखित नोटिस देकर प्रश्नकाल, शून्यकाल या अन्य निर्धारित कार्यवाही को स्थगित करने की मांग कर सकता है।

2. सभापति का विवेकाधिकार
नियम 267 के तहत नोटिस स्वीकार करना या खारिज करना पूरी तरह राज्यसभा के सभापति के विवेक पर निर्भर करता है। उनकी अनुमति के बिना इस नियम के तहत चर्चा शुरू नहीं हो सकती।

3. सदन की मंजूरी
यदि सभापति नोटिस स्वीकार कर लेते हैं, तो नियम के अनुसार सदन में मतदान के जरिए यह तय किया जाता है कि निर्धारित कार्यवाही स्थगित कर संबंधित मुद्दे पर चर्चा कराई जाए या नहीं।

4. सरकार का जवाब देना अनिवार्य
नियम 267 के तहत चर्चा स्वीकार होने पर सरकार को उस विषय पर सदन में औपचारिक जवाब देना पड़ता है। यही वजह है कि विपक्ष अक्सर महत्वपूर्ण मुद्दों पर इसी नियम के तहत चर्चा की मांग करता है।

2000 के संशोधन के बाद क्या बदला?

साल 2000 में किए गए संशोधन के बाद नियम 267 के इस्तेमाल पर कुछ महत्वपूर्ण सीमाएं तय की गईं। एजेंडा से जुड़ा विषय होना जरूरी: अब नियम 267 का इस्तेमाल केवल उन्हीं मामलों में किया जा सकता है जिनका संबंध उस दिन के सूचीबद्ध कार्य (List of Business) से हो। पूरी तरह नया या असंबंधित विषय इस नियम के तहत नहीं उठाया जा सकता।

वैकल्पिक प्रावधान होने पर लागू नहीं: यदि नियमावली के किसी अन्य अध्याय में संबंधित विषय पर कार्यवाही स्थगित करने का अलग प्रावधान मौजूद है, तो नियम 267 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

क्यों है यह नियम महत्वपूर्ण?

नियम 267 विपक्ष को संसद में किसी गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करने का अवसर देता है। हालांकि, इसकी सफलता पूरी तरह सभापति की अनुमति और सदन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। यदि प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो सरकार को उस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देना अनिवार्य होता है, जिससे कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

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