राशन दुकानों पर फिर शुरू होगा केरोसीन वितरण

राशन दुकानों पर फिर शुरू होगा केरोसीन वितरण

Kerosene Scheme India: ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने राशन दुकानों पर केरोसीन बिक्री को मंजूरी दी, जानिए किन राज्यों में मिलेगा फायदा।

Kerosene Scheme India 2026: तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में तरक्की के साथ दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ जरूरी संसाधन भी आधुनिकता का जामा ओढ़ कर हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। बात करें भारतीय रसोइयों में ईंधन के तौर पर आए बदलाव की तो कभी चूल्हे की आग से लेकर गैस सिलेंडर तक का सफर तय करने वाला आम भारतीय अब एक बार फिर पुराने दौर की झलक देखने जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए राशन दुकानों पर केरोसीन ऑयल की बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह कदम भले ही अस्थायी हो, लेकिन इसका असर करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।

पुरानी ईंधन व्यवस्था एक बार फिर लौटती नजर आ रही है

भारत में ईंधन का सफर हमेशा बदलावों से भरा रहा है। पहले लोग लकड़ी और उपलों पर निर्भर थे, फिर केरोसीन स्टोव ने घरों में जगह बनाई और धीरे-धीरे एलपीजी गैस ने इसे पीछे छोड़ दिया। सरकार ने भी समय-समय पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाईं, जिससे केरोसीन का उपयोग कम होता गया। लेकिन अब हालात ऐसे बने हैं कि उसी केरोसीन को फिर से आम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत महसूस हुई है। गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के चलते ठेलों-खोमचों पर रोजमर्रा की कमाई करने वाले रेहड़ी-पटरी दुकानदारों से लेकर रेस्टोरेंट मालिकों तक के लिए बड़ी चुनौती आकर खड़ी हो गई थी। सरकार का यह फैसला निश्चित तौर पर इनके लिए राहत भरी खबर साबित होगा। हालांकि यह वापसी स्थायी नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया कुछ निश्चित समय के लिए एक व्यावहारिक फैसला है।

सरकारें वैकल्पिक ईंधन की ओर ध्यान दे रही हैं

पिछले कुछ हफ्तों से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। तेल उत्पादन और सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन जाती है। ऐसे में सरकार ने एहतियात के तौर पर वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का फैसला लिया, ताकि जरूरत पड़ने पर आम लोगों को परेशानी न हो।

सरकार ने साफ किया है कि केरोसीन ऑयल का वितरण पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत किया जाएगा। यानी राशन दुकानों के माध्यम से लोगों तक यह ईंधन पहुंचाया जाएगा। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को सस्ती दरों पर केरोसीन मिल सकेगा। यह व्यवस्था खासतौर पर उन इलाकों में ज्यादा उपयोगी साबित होगी, जहां एलपीजी या बिजली की सुविधा अभी भी सीमित है।

इस फैसले के तहत देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और दादरा एवं नगर हवेली और दमन-दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेश भी इसमें शामिल हैं। इन क्षेत्रों का चयन इस आधार पर किया गया है कि यहां जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधन की मांग बढ़ सकती है।

सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पंपों को राहत

सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भी इस व्यवस्था को आसान बनाने के लिए राहत दी है। अब पेट्रोल पंपों पर अस्थायी तौर पर 2,500 लीटर तक सुपीरियर केरोसीन ऑयल (SKO) स्टोर करने की अनुमति दी गई है। पहले इस तरह की स्टोरेज पर सख्त नियम लागू थे, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए नियमों में ढील दी गई है। इसका उद्देश्य यही है कि सप्लाई चेन मजबूत बनी रहे और अचानक बढ़ी मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

ग्रामीण विकास को बढ़ावा, शहरी क्षेत्रों में सीमित लाभ

हालांकि शहरी इलाकों में इस फैसले का असर ज्यादा बड़ा नहीं होगा। शहरों में पहले से ही एलपीजी, पाइप्ड गैस और बिजली की बेहतर सुविधा उपलब्ध है। इसलिए यहां के लोग केरोसीन पर निर्भर नहीं हैं। फिर भी आपात स्थिति में यह एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में काम कर सकता है।

संकट प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार

सरकार का यह फैसला ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के इस दौर में यह जरूरी हो जाता है कि देश के पास हर स्थिति से निपटने के लिए विकल्प मौजूद हों। केरोसीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि आम जनता को किसी भी संकट का सामना न करना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस बात का संकेत है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर सतर्क और तैयार रहना चाहता है। भले ही देश तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन पारंपरिक ईंधनों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में सोलर एनर्जी, बायोगैस और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर ज्यादा जोर रहेगा, लेकिन जरूरत पड़ने पर पुराने साधनों का सहारा भी लिया जाएगा।

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