
Congress Party: BJP की जीत से कांग्रेस खुश! ममता-केजरीवाल और नवीन पटनायक का पतन लायेगा राहुल गांधी का स्वर्णिम युग?
Congress Party: हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) असम में अपनी सत्ता बचाने और पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक प्रदर्शन से उत्साहित है, वहीं कांग्रेस की खुशी के पीछे एक गहरा रणनीतिक गणित छिपा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और नवीन पटनायक जैसे कद्दावर क्षेत्रीय क्षत्रपों की कम होती पकड़ भविष्य में कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। कांग्रेस इसे एक अवसर के रूप में देख रही है क्योंकि उसका मानना है कि क्षेत्रीय दलों के सीमित होने से सीधा मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होगा, जिसका दीर्घकालिक लाभ उसे मिल सकता है।
क्या क्षेत्रीय क्षत्रपों का पतन कांग्रेस की वापसी का रास्ता साफ करेगा?
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो जिन राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत हुए, वहां कांग्रेस का जनाधार तेजी से सिमटा है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और गुजरात जैसे राज्यों में आज भी सीधा मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही रहता है। अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी और ओडिशा में बीजू जनता दल की चुनावी हार ने कांग्रेस को नई उम्मीद दी है। कांग्रेस की रणनीति यह है कि त्रिकोणीय संघर्ष समाप्त होने पर जो सत्ता विरोधी वोट क्षेत्रीय दलों की ओर जाते थे, वे अब सीधे उसकी झोली में आएंगे। दिल्ली के 2025 चुनावों में भी यह देखा गया कि कई सीटों पर कांग्रेस के वोट प्रतिशत में सुधार ने सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया।
Congress Party: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बीजेपी की जीत से कांग्रेस को क्यों है उम्मीद?
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के उदय के बाद से कांग्रेस हाशिए पर चली गई थी। दशकों की कोशिशों के बाद भी कांग्रेस टीएमसी के किले में सेंध नहीं लगा पाई, लेकिन अब बीजेपी द्वारा वहां बनाए गए दबाव को कांग्रेस अपने लिए एक खाली स्थान (Vaccuum) के रूप में देख रही है। ठीक यही स्थिति ओडिशा में भी है, जहां नवीन पटनायक के 25 साल के शासन के बाद बीजेडी के बिखरते संगठन ने कांग्रेस को दोबारा जमीन तलाशने का मौका दिया है। कांग्रेस नेतृत्व को भरोसा है कि अगले विधानसभा चुनावों तक वह इन राज्यों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरकर बीजेपी को सीधी चुनौती देने की स्थिति में होगी।
संगठन की मजबूती के बिना क्या बीजेपी को मिल पाएगी कड़ी चुनौती?
हालांकि क्षेत्रीय दलों की हार से कांग्रेस का रास्ता जरूर साफ हुआ है, लेकिन चुनौती अभी कम नहीं हुई है। सिर्फ विपक्षी दलों की हार से काम नहीं चलेगा, बल्कि कांग्रेस को जमीनी स्तर पर अपने संगठन को पुनर्जीवित करना होगा। उदाहरण के तौर पर, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस ने खुद मेहनत कर सत्ता हासिल की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जहां संगठन मजबूत है वहां परिणाम बेहतर आते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कांग्रेस अब भी क्षेत्रीय सहयोगियों के पीछे चलने को मजबूर है। पंजाब, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस के पास अब पर्याप्त समय है कि वह 2029 या 2034 के लोकसभा चुनावों से पहले खुद को इतना सक्षम बना ले कि बाकी क्षेत्रीय दल उसके नेतृत्व को स्वीकार करने पर विवश हो जाएं।
