Chandauli News: स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनी आशा बहुएं, सिस्टम की अनदेखी का शिकार

Chandauli News: स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनी आशा बहुएं, सिस्टम की अनदेखी का शिकार

Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली हजारों आशा बहुएं इन दिनों सरकारी सिस्टम की अनदेखी का शिकार हो रही हैं। मामला केवल एक ब्लॉक या तहसील का नहीं, बल्कि पूरे जिले का है, जहां पिछले दो महीनों से आशा बहुओं को उनके पारिश्रमिक का भुगतान नहीं किया गया है। विभाग की ओर से तकनीकी दावों और जमीनी हकीकत के बीच फंसी ये महिलाएं अब आर्थिक तंगी से गुजर रही हैं।

पूरे जिले में एक जैसी समस्या

नौगढ़ तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक, चंदौली की लगभग सभी आशा बहुओं की व्यथा एक जैसी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मार्च महीने में ही आशा बहुओं के मोबाइल पर DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भुगतान भेजे जाने का संदेश भेजा गया था। लेकिन विडंबना यह है कि फोन पर ‘पैसा भेजे जाने’ की सूचना तो आ गई, पर बैंक खातों में आज तक फूटी कौड़ी भी नहीं पहुंची। डिजिटल इंडिया के दौर में इस तरह की तकनीकी धोखाधड़ी से आशा कार्यकर्ताओं में गहरा रोष है।

आशा कार्यकर्ताओं को नहीं मिला भुगतान

यहां मार्च का महीना तो तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ ही गया था, अब अप्रैल का महीना भी बीत चुका है। दो महीने से मानदेय न मिलने के कारण जिले की आशा बहुओं के सामने घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है। कई आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे उधार लेकर ड्यूटी पर जा रही हैं, लेकिन विभाग उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। घर के राशन से लेकर बच्चों की फीस तक के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है।

जमीनी स्तर पर काम, फिर भी उपेक्षा

यहां एक तरफ जहां आशा बहुओं को स्वास्थ्य विभाग की ‘नींव’ माना जाता है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान हो, टीकाकरण हो, या मातृ-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम—इन सभी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन इन्हीं के कंधों पर होता है। वहीं अब भीषण गर्मी में घर-घर जाकर सेवाएं देने वाली इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब विभाग पारिश्रमिक देने में ही महीनों लगा देता है, तो सरकारी दावों की गंभीरता पर सवाल उठना लाजमी है।

तकनीकी समस्या बनी वजह

वहीं इस गंभीर समस्या के संबंध में जब विभाग से जवाब मांगा गया, तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. अवधेश पटेल ने बताया कि समस्या तकनीकी स्तर पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “वर्तमान में जिला ट्रेजरी में डाटा फीडिंग की प्रक्रिया चल रही है। इसी तकनीकी कारण से एनएचएम (NHM) के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मियों का वेतन और मानदेय रुका हुआ है। जैसे ही फीडिंग का कार्य पूर्ण होगा, भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।”

प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद

जिले भर की आशा बहुओं ने अब एकजुट होकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि तकनीकी खामियों को युद्धस्तर पर दूर कर उनके दो महीने का रुका हुआ मानदेय तत्काल जारी किया जाए। यदि जल्द ही भुगतान नहीं हुआ, तो जमीनी स्तर पर चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर इसका बुरा असर पड़ना तय है।

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