Lalu Prasad Yadav: चारा घोटाला मामले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जमानत रद्द करने से इनकार

Lalu Prasad Yadav: चारा घोटाला मामले में लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जमानत रद्द करने से इनकार

Lalu Prasad Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उन्हें जमानत मिले करीब छह साल हो चुके हैं, ऐसे में अब उनकी आजादी में दखल देना उचित नहीं होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। इसलिए झारखंड हाईकोर्ट से लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने और संभव हो तो छह महीने के भीतर फैसला देने का अनुरोध किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि जमानत दिए जाने के बाद काफी समय बीत चुका है। ऐसे में फिलहाल उस आदेश में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि 2018 से लंबित अपीलों का जल्द निपटारा होना चाहिए, ताकि मामले पर अंतिम फैसला आ सके।

CBI ने क्या दलील दी?

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव की सजा की अवधि का गलत आकलन किया था। जांच एजेंसी का कहना था कि चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में मिली सजाएं एक साथ नहीं बल्कि क्रमवार चलनी चाहिए थीं। ऐसे में कुल सजा लगभग 14 साल बनती है और जमानत दिए जाने के समय लालू यादव ने आधी सजा पूरी नहीं की थी। सीबीआई ने इसी आधार पर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी।

लालू यादव की ओर से क्या कहा गया?

लालू यादव की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि सजा एक साथ चलेगी या अलग-अलग, यह अंतिम सुनवाई के दौरान तय किया जाने वाला मुद्दा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिम जमानत या सजा पर रोक देने के दौरान इस आधार पर फैसला नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने अदालत से कहा कि यदि हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई तेज करने का आदेश दिया जाता है तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

चारा घोटाला क्या है?

चारा घोटाला बिहार के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। यह मामला 1992 से 1995 के बीच अविभाजित बिहार के सरकारी खजानों से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये निकालने से जुड़ा है। जांच के अनुसार, पशुओं के चारे, दवाइयों और उपकरणों की खरीद के नाम पर करीब 950 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी की गई थी। इस घोटाले से जुड़े कुल 55 मामले दर्ज किए गए थे।

किन मामलों में दोषी हैं लालू यादव?

लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। इनमें चाईबासा, देवघर, दुमका और डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले शामिल हैं। इन मामलों में उन्हें अलग-अलग सजाएं सुनाई गई थीं, जिसके खिलाफ उनकी अपील झारखंड हाईकोर्ट में लंबित है।

स्वास्थ्य का भी दिया गया हवाला

लालू यादव की ओर से अदालत में उनकी उम्र और स्वास्थ्य का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि उनकी उम्र 77 वर्ष है और वर्ष 2022 में उनका किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) भी हो चुका है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए उनकी जमानत बरकरार रखने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल लालू यादव की जमानत जारी रहेगी। अब सभी की नजर झारखंड हाईकोर्ट पर होगी, जहां चारा घोटाला मामलों में लंबित अपीलों की सुनवाई तेज की जाएगी। इन अपीलों पर आने वाला फैसला ही तय करेगा कि भविष्य में इस मामले की कानूनी दिशा क्या होगी।

 

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