Share Market Rally: सेंसेक्स-निफ्टी में तूफानी तेजी, निवेशकों की हुई चांदी; एक दिन में कमाए 6.9 लाख करोड़ !

Share Market Rally: सेंसेक्स-निफ्टी में तूफानी तेजी, निवेशकों की हुई चांदी; एक दिन में कमाए 6.9 लाख करोड़ !

Share Market Rally: दिवाली से पहले शेयर बाजार ने निवेशकों को शानदार तोहफा दिया है। गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर ऐसी तेजी आई कि सेंसेक्स 1,600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी ने भी करीब 2 फीसदी की छलांग लगा दी। बाजार में इस जोरदार खरीदारी से निवेशकों की संपत्ति में करीब 6.9 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, अमेरिकी चुनाव के नतीजों से बदला वैश्विक माहौल और विदेशी निवेशकों की जोरदार वापसी ने भारतीय बाजार में नई जान फूंक दी है।

गुरुवार सुबह कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,609.54 अंक यानी 2.08 फीसदी की तेजी के साथ 78,910.94 तक पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 417.45 अंक यानी 1.74 फीसदी उछलकर 24,378.05 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह 10:28 बजे तक सेंसेक्स 78,798.25 और निफ्टी 24,387.85 पर कारोबार कर रहे थे। इस तरह बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। पिछले पांच सत्रों में सेंसेक्स पहले ही 4,000 से ज्यादा अंक चढ़ चुका था।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी है। बाजार की इस तेजी के पीछे पांच बड़े कारण सामने आए हैं।

1. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। गुरुवार को इसमें करीब 1 फीसदी की और गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले बुधवार को ब्रेंट क्रूड 8.7 फीसदी टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। अमेरिकी WTI क्रूड भी 90 डॉलर के नीचे आ गया।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश का आयात बिल, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम हो सकता है। इससे रुपये को भी सहारा मिलता है और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ती है।

2. अमेरिकी चुनाव में ट्रंप को झटका, बाजार में बढ़ा भरोसा

अमेरिका के नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों ने भी भारतीय बाजार की चाल बदलने में अहम भूमिका निभाई है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

इस नतीजे के बाद अमेरिकी संसद में ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना है। खासकर ईरान के साथ जारी अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर कूटनीतिक समाधान की उम्मीद मजबूत हुई है। बाजार को लग रहा है कि तनाव कम होने पर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिल सकती है।

Geojit Investments के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव परिणामों से वैश्विक निवेश धारणा में सुधार हुआ है। व्यापार और टैरिफ नीतियों में नरमी की उम्मीद उभरते बाजारों में विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकती है।

3. विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को बड़ा सहारा

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी भी तेजी का बड़ा कारण बनी है। लंबे समय तक भारतीय बाजार से पैसा निकालने वाले विदेशी निवेशक अब लगातार खरीदारी कर रहे हैं।

बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब विदेशी निवेशकों ने शुद्ध खरीदारी की। नवंबर के शुरुआती तीन कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश का आंकड़ा करीब 17,235 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में तरलता बढ़ने और शेयरों की मांग मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि, विदेशी निवेश की यह वापसी कितनी टिकाऊ रहती है, इस पर बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

पोनमुडी आर के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों की दोबारा खरीदारी शुरू होना घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी के लिए सकारात्मक संकेत है।

4. रुपये की मजबूती ने भी बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती ने भी बाजार की तेजी को समर्थन दिया है। गुरुवार को रुपया 94.35 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 94.32 तक पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को रुपया 95.64 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

इस तरह रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई। वहीं डॉलर इंडेक्स भी गिरकर 101.18 पर आ गया।

रुपये की मजबूती से भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव कम होने की उम्मीद है। खासकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत के लिए यह राहत भरा संकेत है।

5. बैंकिंग से लेकर मिडकैप-स्मॉलकैप तक हर तरफ खरीदारी

गुरुवार की तेजी सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी के बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बाजार के ज्यादातर सेक्टर और व्यापक सूचकांक भी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए।

निफ्टी मिडकैप 100 में 1.46 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.49 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। सेक्टरों में निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे आगे रहा और इसमें 2.55 फीसदी की बढ़त आई। वहीं निफ्टी रियल्टी में 1.92 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

कुल 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 में तेजी रही। इससे संकेत मिला कि बाजार में खरीदारी कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा लौट रहा है।

आगे भी जारी रहेगी बाजार की तेजी?

दलाल स्ट्रीट की मौजूदा तेजी ने निवेशकों की उम्मीदें जरूर बढ़ाई हैं, लेकिन इसके बने रहने की गारंटी नहीं है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक हैं।

हालांकि, अमेरिका-ईरान संघर्ष का वास्तविक समाधान अभी बाकी है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है या नहीं और वैश्विक बाजारों का रुख कैसा रहता है, यह भी अहम होगा। फिलहाल दिवाली से पहले बाजार की इस शानदार तेजी ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है।

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