
Strategy of Akhilesh Yadav : 2027 की जंग की तैयारी शुरू, मुद्दों के सहारे सपा का सियासी दांव
Strategy of Akhilesh Yadav : उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय उस दहलीज पर खड़ी है, जहां से 2027 के विधानसभा चुनावों की तपिश अभी से महसूस की जाने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘डबल इंजन’ सरकार के सामने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने चुनौतियों का एक ऐसा जाल बिछाना शुरू कर दिया है, जिससे पार पाना भाजपा के लिए आसान नहीं लग रहा। चुनाव में अभी साल भर से ज्यादा का समय शेष है, लेकिन अखिलेश यादव ने बिजली, तेल, गैस और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों को उठाकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करनी शुरू कर दी है। सपा प्रमुख अब योगी सरकार को घेरने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं।
स्मार्ट मीटर पर बवाल, यूपी में सड़कों पर उतरी जनता
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है। आलम यह है कि महिलाएं अपने घरों से मीटर नोचकर सड़कों पर फेंक रही हैं। लोगों का आरोप है कि जिन घरों का बिल पहले 500 रुपये आता था, अब सीधे 1500 रुपये तक पहुंच रहा है। अखिलेश यादव ने इसे सीधे ‘भ्रष्टाचार की लूट’ करार दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि 2027 में सपा की सरकार बनते ही 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए योगी सरकार ने फिलहाल नए मीटर लगाने पर रोक लगा दी है और जांच के लिए कमेटी बनाई है, लेकिन विपक्ष ने इसे अपनी पहली नैतिक जीत के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है।
होर्मुज संकट की आंच यूपी तक, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
मिडल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब यूपी के चूल्हों और गाड़ियों के पहियों पर साफ दिख रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की खबरों के बीच प्रदेश में गैस और तेल की किल्लत गहरा गई है। पूर्वांचल के गोरखपुर और वाराणसी जैसे जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं। कमर्शियल सिलेंडर के बढ़ते दामों पर चुटकी लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी महंगाई पर निंदा प्रस्ताव कब लाएगी? उन्होंने तंज कसा कि सिलेंडर महंगा होने से सिर्फ गैस नहीं, बल्कि गरीब की थाली की रोटी महंगी होती है। तेल और गैस के लिए तरसती जनता का यह गुस्सा भाजपा के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।
नोएडा में मजदूरों की हुंकार: चुनावी मुद्दा बना ‘औद्योगिक असंतोष’
देश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में मजदूरों की हड़ताल और उसके बाद हुई हिंसा ने भी राजनीतिक मोड़ ले लिया है। न्यूनतम मजदूरी और सुरक्षा की मांग कर रहे मजदूरों पर पुलिसिया कार्रवाई को अखिलेश यादव ने ‘जन शक्ति’ का अपमान बताया है। उन्होंने मांग की है कि एक्टिविस्ट और युवाओं पर लगाए गए फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं। चूंकि ये मजदूर यूपी के हर कोने से आते हैं, इसलिए इनके जरिए अखिलेश पूरे प्रदेश के श्रमिक वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण बनाम भाजपा की नियत, अखिलेश का बड़ा आरोप
महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार और सपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सपा को घेरने के बाद अखिलेश ने पलटवार करते हुए भाजपा को ‘बदरंग’ और ‘गिरगिट’ तक कह डाला। अखिलेश का आरोप है कि भाजपा का पुरुषवादी संगठन कभी महिलाओं को वास्तविक सत्ता नहीं देना चाहता, इसलिए परिसीमन जैसे षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाएं ही बीजेपी का ‘काल’ बनेंगी। आरक्षण के इस मुद्दे को अखिलेश अब महिला सशक्तिकरण बनाम भाजपा की नियत की लड़ाई बना रहे हैं।
‘पीडीए’ का विस्तार और सवर्णों की नाराजगी पर नजर
अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी नैय्या पार लगाने के लिए ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का जो फार्मूला दिया है, अब उसमें वे सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों को भी जोड़ने की कवायद कर रहे हैं। यूजीसी की नई गाइडलाइन के बाद सवर्णों में उभरी नाराजगी को अखिलेश एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। वे पिछड़ों और दलितों की राजनीति के साथ-साथ नाराज सवर्णों को यह एहसास दिला रहे हैं कि योगी सरकार में केवल चंद लोगों का ही भला हो रहा है।
पेपर लीक और बेरोजगारी: युवाओं के बीच ‘नाराजगी’ की लहर
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय में हुए पेपर लीक कांड और भर्ती परीक्षाओं में देरी ने युवाओं के बीच सरकार के प्रति अविश्वास पैदा किया है। अखिलेश यादव हर मंच से इसे प्रशासनिक असफलता बता रहे हैं। आवारा पशुओं की समस्या, किसानों की बदहाली और अल्पसंख्यक इलाकों में ‘बुलडोजर न्याय’ की आलोचना करके सपा प्रमुख ने एक ऐसा साझा मोर्चा तैयार कर लिया है, जो 2027 में भाजपा के ‘हिंदुत्व’ कार्ड के सामने बड़ी चुनौती बन सकता है।
कुल मिलाकर, यूपी की सियासत अब केवल मंदिर या बड़े प्रोजेक्ट्स के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि बिजली के मीटर, गैस के सिलेंडर और युवाओं की नौकरी के इर्द-गिर्द घूम रही है। अखिलेश यादव के ये ‘दांव’ योगी सरकार की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। अब देखना यह है कि भाजपा इन बुनियादी सवालों का क्या जवाब लेकर आती है।
