Supreme Court on Firecrackers: पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन दिन-रात फोड़ने की भी नहीं होगी छूट !

Supreme Court on Firecrackers: पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं, लेकिन दिन-रात फोड़ने की भी नहीं होगी छूट !

Supreme Court on Firecrackers: पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को साफ किया कि देश में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं है। हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि लोग दिन-रात किसी भी समय पटाखे फोड़ सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि पटाखों को लेकर ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिसमें त्योहारों की परंपरा और लोगों के स्वास्थ्य व पर्यावरण से जुड़े पहलुओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरी तरह पटाखों पर रोक लगाने से लोगों की भावनाएं प्रभावित होंगी। वहीं, 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति देने से बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों समेत दूसरे जीव-जंतुओं पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।

‘न पूरी तरह रोक लगाएंगे, न 24 घंटे पटाखे चलाने देंगे’

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वह न तो पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है और न ही पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि पूरी तरह रोक से लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जबकि पूरे 24 घंटे पटाखे चलाने की इजाजत देने से कई लोगों और जीवों को परेशानी हो सकती है। पीठ ने कहा कि दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोई समाधान निकालना जरूरी है।

पटाखे चलाने के लिए तय किया जा सकता है समय

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा समाधान तलाशने की जरूरत है, जिसके तहत पटाखे चलाने के लिए एक निश्चित समय तय किया जा सके। यानी कोर्ट का संकेत है कि पटाखों के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसके लिए समय की सीमा तय करने पर विचार किया जा सकता है। इससे त्योहार मनाने की परंपरा भी बनी रहे और लोगों को होने वाली परेशानी को भी कम किया जा सके।

ग्रीन क्रैकर्स पर भी सामने आया प्रस्ताव

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एक नोट कोर्ट के सामने रखा। इसमें कहा गया कि CSIR-NEERI की सिफारिश वाले कुछ खास ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंटेड ग्रीन क्रैकर्स’ के इस्तेमाल में सीमित और शर्तों के साथ छूट पर विचार किया जा सकता है।

इन पटाखों को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी CSIR-NEERI के सहयोग से विकसित किया गया है। इन नए तरह के जुड़े हुए ग्रीन क्रैकर्स में उत्सर्जन कम करने के लिए बेरियम साल्ट की मात्रा कम रखने की बात कही गई है।

दिवाली से पहले पटाखों को लेकर अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दिवाली से पहले आया है। पिछले साल शीर्ष अदालत ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें भी रखी गई थीं।

इस पूरे मामले में कोर्ट के सामने एक तरफ त्योहारों से जुड़ी परंपराएं और लोगों की भावनाएं हैं, तो दूसरी तरफ पटाखों से होने वाले असर को लेकर चिंताएं हैं। बुधवार की सुनवाई में कोर्ट ने इसी वजह से पूरी तरह रोक लगाने और बिना किसी समय सीमा के पटाखे चलाने, दोनों के बीच रास्ता निकालने की जरूरत बताई।

 

 

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