
Bhind News: मनीष विद्यापीठ स्कूल में मनाई गई आदिकवि महर्षि बाल्मीकी जी की जयंती !
Bhind News: मध्य प्रदेश के जिला भिंड के लहार में मनीष विद्यापीठ स्कूल में आज दिनांक 26/10/2025 दिन सोमवार को बड़े ही उत्साहके साथ महर्षि बाल्मीकी जी की जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम विद्यालय प्रबंधन समिति, स्टाफ ने महर्षि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया।
लहार में कार्यक्रम में आगे विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि वाल्मीकी जी संस्कृत रामायण के प्रसिद्ध रचयिता थे जो आदिकवि के रूप में प्रसिद्ध रहे। उन्होंने संस्कृत मे रामायण की रचना की। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रची रामायण वाल्मीकि रामायण कहलाई। रामायण एक महाकाव्य है जो कि भगवान राम के जीवन के माध्यम से हमें जीवन के सत्य व कर्तव्य से, परिचित करवाता है। वाल्मीकी जी ने संस्कृत के प्रथम महाकाव्य की रचना की थी। प्रथम संस्कृत महाकाव्य की रचना करने के कारण वाल्मीकी आदिकवि कहलाये।
अगले क्रम में विद्यालय की संचालिका ने बताया कि ऐसा वर्णन है एवं धर्म ग्रंथो के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का पूर्व नाम रत्नाकर था, जो पहले एक डाकू के रूप में जीवन यापन करते थे। एक दिन जंगल में लूट के इरादे से छिपे हुए रत्नाकर की मुलाकात नारद मुनि से हुई। इस दौरान नारद मुनि ने उनसे पूछा कि जो पाप कर्म हुए अपने परिवार के लिए कर रहे हैं, क्या उनका परिवार उन कर्मों के बुरे परिणाम भोगने को तैयार है? जब रत्नाकर यानी महर्षि नहीं यह सवाल
अपने परिवार से किया तो सभी ने इनकार कर दिया। इस घटना से रत्नाकर के मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने तपस्या का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। कई वर्षों तक राम नाम का जाप करते हुए पूर्ण ध्यान में लीन रहे जिससे उनके शरीर पर चीटियों ने दीमक बना ली दीमको का घर वाल्मीकि कहलाता है, और इसी कारण से उनका नाम वाल्मीकि पड़ा। यही कारण है कि उनकी तपस्या और परिवर्तन में उन्हें महर्षि का पद दिलाया।
इस कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के संरक्षक, संचालिका, प्राचार्या एवं समस्त स्टॉफ आदि उपस्थित रहे।
संवाददाता- विमलेश, भिंड ( मध्य प्रदेश )
