Delhi News: चुनाव आयोग पर Express रिपोर्ट के बाद केजरीवाल बोले- हालिया चुनाव रद्द हों !

Delhi News: चुनाव आयोग पर Express रिपोर्ट के बाद केजरीवाल बोले- हालिया चुनाव रद्द हों !

Delhi News: चुनाव आयोग को लेकर The Indian Express की नई जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग करते हुए हाल के वर्षों में हुए चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की भी मांग की है।

केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ज्ञानेश कुमार कथित तौर पर चुनाव आयोग को अकेले चला रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों सदस्यों को मिलकर फैसले लेने होते हैं।

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएं और दोबारा चुनाव कराए जाएं।”

क्या है Indian Express की जांच में दावा?

The Indian Express की 23 सितंबर की जांच के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा के नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को “unauthorised” और “illegal” बताया और दिल्ली में मतदाता डेटा के नियंत्रण को केंद्रीकृत किए जाने को लेकर भी चिंता जताई।

Form 6 में बदलाव पर भी उठे सवाल

जांच के मुताबिक, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में SIR से जुड़ा एक नया घोषणा-पत्र जोड़ा गया। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका या उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली मतदाता सूची में था या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी ने 16 मई को आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि Form 6 वैधानिक नियमों के तहत निर्धारित है और इसमें बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी 19 मई को जोशी की आपत्ति से सहमति जताई थी।

SIR को लेकर क्या है विवाद?

Indian Express की जांच के मुताबिक, SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। हालांकि, ये आंकड़े ड्राफ्ट रोल से हटाए गए नामों के हैं और प्रक्रिया के दौरान नाम जोड़ने, बहाल करने और दावों-आपत्तियों का दौर भी चलता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ मामलों में मतदाता सूची और उसे संचालित करने वाले सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण को लेकर चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई। Goa का उदाहरण देते हुए जांच में दावा किया गया कि 97 ऐसे मतदाता थे जिन्हें स्थानीय Electoral Registration Officer ने योग्य पाया, लेकिन सॉफ्टवेयर के स्तर पर उनके नाम दर्ज नहीं हो सके।

केजरीवाल ने SIR के जरिए मतदाता सूचियों में हुए बदलावों पर सवाल उठाते हुए तीन साल पुरानी electoral rolls बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश समेत हाल के वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द कर फिर से कराने की मांग रखी।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को किसी एक व्यक्ति के फैसलों के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। उनके मुताबिक, CEC तीन सदस्यीय आयोग के “First Among Equals” यानी बराबरों में प्रथम होते हैं और उनकी भूमिका बैठक की अध्यक्षता करने की है।

चुनाव आयोग की ओर से क्या जवाब आया?

हालांकि, इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने Hindustan Times को बताया कि SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी थी। आयोग से जुड़े सूत्रों ने Indian Express की रिपोर्ट में बताए गए आंतरिक मतभेद के आकलन को खारिज किया है।

इसलिए फिलहाल विवाद का केंद्र यह है कि दो चुनाव आयुक्तों की रिकॉर्ड पर दर्ज आपत्तियों को किस संदर्भ में देखा जाए और क्या वे आयोग के अंतिम फैसलों पर वास्तविक असहमति को दर्शाती हैं। Indian Express ने अपनी जांच में कम से कम 14 आपत्तियों का उल्लेख किया है, जबकि आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।

 

CATEGORIES
TAGS
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus ( )