
Kedartal Avalanche: केदारताल हिमस्खलन में गई लखनऊ की दो सगी बहनों की जान, पिता का छलका दर्द- ‘एक साथ गईं और एक साथ ही दुनिया छोड़ गईं’
Kedartal Avalanche: उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित केदारताल ट्रैक पर आए भीषण हिमस्खलन ने लखनऊ के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी दो सगी बहनों दीपिका वर्मा और वर्तिका वर्मा की बर्फ में दबकर मौत हो गई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोनों के शव बरामद होने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। अपनी दोनों बेटियों को एक साथ खोने वाले पिता श्री नारायण वर्मा का दर्द अब छलक पड़ा है। उन्होंने ट्रैकिंग एजेंसी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लखनऊ के सांसद और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मदद नहीं करते, तो शायद उन्हें अपनी बेटियों के अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं ह
26 अक्टूबर को ट्रैकिंग पर निकली थीं दोनों बहनें
कृषि विभाग से सेवानिवृत्त श्री नारायण वर्मा के मुताबिक, उनकी बेटियां दीपिका और वर्तिका 26 अक्टूबर को उत्तराखंड की एक निजी ट्रैकिंग कंपनी के 12 सदस्यीय दल के साथ केदारताल ट्रैक पर गई थीं। करीब 20 किलोमीटर का सफर पूरा हो चुका था और मंजिल केवल 5 से 6 किलोमीटर दूर थी। इसी बीच 27 अक्टूबर को अचानक भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आने से गाइड समेत पूरा दल लापता हो गया।
पिता का आरोप है कि इतने बड़े हादसे के बावजूद ट्रैकिंग एजेंसी ने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। एक नवंबर को सोशल मीडिया के जरिए परिवार को घटना की जानकारी मिली। इसके बाद भाई अतुल वर्मा अपने परिजनों के साथ तत्काल गाड़ी से उत्तरकाशी रवाना हो गए। प्रशासन की ओर से चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि बरामद चार शवों में दीपिका और वर्तिका भी शामिल थीं।
राजनाथ सिंह की मदद से मिले बेटियों के शव
बेटियों को खोने का गम झेल रहे पिता ने रुंधे गले से बताया कि इस मुश्किल घड़ी में लखनऊ के सांसद एवं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने काफी सहयोग किया। उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग एजेंसी ने परिवार को अंधेरे में रखा। यदि राजनाथ सिंह का सहयोग नहीं मिलता, तो शायद बेटियों के शव भी परिवार तक नहीं पहुंच पाते।
उन्होंने उत्तरकाशी के जिलाधिकारी और स्थानीय प्रशासन का भी आभार जताया, जिन्होंने राहत एवं बचाव कार्य के दौरान परिवार की मदद की। हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से पिता काफी आहत हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई दिनों तक मीडिया में खबरें चलने के बावजूद इलाके का कोई विधायक या पार्षद परिवार को सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा।
पहाड़ों से था दोनों बहनों को गहरा लगाव
दीपिका और वर्तिका दोनों को पहाड़ों और ट्रैकिंग का बेहद शौक था। बड़ी बेटी दीपिका डिजाइनर थीं और अमेरिका की एक कंपनी के साथ वर्क फ्रॉम होम कर रही थीं। वहीं, छोटी बेटी वर्तिका एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में भी पहचान रखती थीं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 6 हजार फॉलोअर्स थे। वह अक्सर अपने ट्रैकिंग वीडियो और यात्राओं के अनुभव साझा करती थीं।
वर्तिका इससे पहले हिमाचल, कश्मीर, नेपाल और चीन सीमा से सटे दुर्गम इलाकों में भी ट्रैकिंग कर चुकी थीं। परिवार में उनकी शादी की बातचीत भी चल रही थी। वह अक्सर पिता से कहती थीं, ‘पापा, बस एक साल और रुक जाइए।’
अपनी दोनों बेटियों को याद कर पिता फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि दोनों बहनों के बीच बेहद गहरा लगाव था। वे जहां भी जाती थीं, हमेशा साथ जाती थीं। इस बार भी दोनों एक साथ ट्रैकिंग पर गईं और एक साथ ही दुनिया छोड़कर चली गईं।
पिता ने दर्द भरे शब्दों में कहा, ‘मेरे सीने पर जिंदगी भर का बोझ रखकर चली गईं।’
दो बेटियों को एक साथ खोने वाले परिवार का दर्द पूरे इलाके को गमगीन कर रहा है। जिस घर में बेटियों की हंसी और खुशियों की गूंज रहती थी, वहां अब सिर्फ उनकी यादें और कभी न भरने वाला खालीपन रह गया है।
