India-China Trade 2026: सीमा तनाव के बावजूद भारतीय बाजार में चीन का दबदबा बरकरार

India-China Trade 2026: सीमा तनाव के बावजूद भारतीय बाजार में चीन का दबदबा बरकरार

India-China Trade 2026: चीन अपने सस्ते और बड़े पैमाने पर बनने वाले प्रोडक्ट्स के दम पर दुनिया के अधिकांश देशों के बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। वहीं भारत और चीन के बीच राजनीतिक तनाव और सीमा विवाद के बावजूद दोनों देशों के व्यापार में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। साल 2026 के पहले छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने चीन से रिकॉर्ड स्तर पर सामान आयात किया है। इसी के साथ भारत का चीन को निर्यात भी बढ़ा है, लेकिन आयात की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा और बढ़ गया है। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, बैटरी और केमिकल्स जैसे कई अहम क्षेत्रों में भारत की चीन पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है।

छह महीने में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत-चीन व्यापार

जनवरी से जून 2026 के दौरान भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 91.72 अरब डॉलर रहा है। जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23.6 प्रतिशत अधिक है। यह अब तक की सबसे तेज बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है। इस दौरान भारत का चीन को निर्यात भी 37.2 प्रतिशत बढ़कर 12.31 अरब डॉलर पहुंच गया। निर्यात बढ़ने के बावजूद आयात का स्तर इतना अधिक रहा कि व्यापार घाटा लगातार बढ़ता गया।

आयात ज्यादा होने से बढ़ा व्यापार घाटा

भारत ने चीन से जितना सामान खरीदा, उसके मुकाबले काफी कम सामान चीन को निर्यात किया। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर करीब 67.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार घाटे का मतलब है कि किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होना। लंबे समय तक बढ़ता व्यापार घाटा किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा का अधिक बहिर्गमन होता है।

चीन से आयात लगातार क्यों बढ़ रहा है?

भारत सिर्फ तैयार सामान ही नहीं खरीदता, बल्कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और जरूरी कल-पुर्जों का भी बड़ी मात्रा में आयात करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कई सेक्टर चीन से आने वाले उत्पादों पर निर्भर हैं। चीन कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन करता है और उसकी सप्लाई चेन काफी मजबूत है। यही कारण है कि भारतीय कंपनियों के लिए वहां से सामान खरीदना कई मामलों में अधिक सुविधाजनक और किफायती पड़ता है।

भारत -चीन से किन-किन उत्पादों का आयात करता है?

भारत -चीन से सबसे ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पाद खरीदता है। इनमें स्मार्टफोन और उनके पार्ट्स, टेलीकॉम उपकरण, सेमीकंडक्टर (चिप), लिथियम-आयन बैटरियां, चार्जर, सर्वर, कंप्यूटर हार्डवेयर, औद्योगिक मशीनें, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, पॉलिमर और सोलर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा दवा उद्योग में उपयोग होने वाले कई कच्चे रसायन भी चीन से आयात किए जाते हैं।

भारत -चीन को किन उत्पादों का निर्यात करता है?

भारत- चीन को मुख्य रूप से खनिज और खनिज अयस्क, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद, धातुएं, हीरे-रत्न, ज्वेलरी और दवाइयों से जुड़े उत्पाद निर्यात करता है। इन उत्पादों के निर्यात में इस साल अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल मूल्य अभी भी चीन से होने वाले आयात की तुलना में काफी कम है।

कई बड़े उद्योग आज भी चीन की सप्लाई पर निर्भर हैं

देश में बनने वाले मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और कई औद्योगिक मशीनों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स चीन से आते हैं। भारत में कई कंपनियां अंतिम उत्पाद तैयार करती हैं, लेकिन उनके लिए जरूरी चिप्स, बैटरियां, डिस्प्ले, मोटर, कैमिकल्स और अन्य पार्ट्स का बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है। यही वजह है कि चीन से आयात में किसी तरह की बाधा आने पर कई उद्योगों की उत्पादन लागत और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर दे रही जोर

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से ‘मेक इन इंडिया’ और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी उत्पादन में भी बड़े निवेश किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन जैसी मजबूत सप्लाई चेन का विकल्प तैयार करने में अभी कुछ वर्षों का समय लगेगा।

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