
Major success for DRDO: 48 घंटे में 3 मिसाइल परीक्षण सफल, भारत एलीट डिफेंस क्लब में शामिल
Major success for DRDO: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के उन चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में अपनी जगह बना ली है, जिनके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों से बचाव करने की अत्याधुनिक क्षमता मौजूद है। भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन महत्वपूर्ण मिसाइल परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
इन परीक्षणों में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (Ballistic Missile Defence) और एंटी-शिप मिसाइल (Anti-Ship Missile) तकनीक दोनों शामिल रहीं।
इन सफल परीक्षणों के साथ भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य में सामने आने वाले उन्नत मिसाइल खतरों का प्रभावी तरीके से मुकाबला करने में सक्षम है। यह उपलब्धि देश की रक्षा तैयारियों को एक नए स्तर पर ले जाने वाली मानी जा रही है।
24 घंटे में तीन बड़े मिसाइल परीक्षण
डीआरडीओ के मुताबिक, 24 घंटे के भीतर किए गए इन तीन महत्वपूर्ण परीक्षणों ने लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस आर्किटेक्चर (Multi-Layered Defence Architecture) की मजबूती को साबित कर दिया है।
परीक्षण के दौरान मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत भविष्य में किसी भी उन्नत बैलिस्टिक मिसाइल खतरे का सामना करने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार है।
इन घातक मिसाइलों को रोकने की क्षमता
शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, डीआरडीओ ने दो ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है जो 2000 किलोमीटर से 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (Intermediate Range Ballistic Missile-IRBM) को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।इनमें एक एक्सो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर (Exo-Atmospheric Interceptor) है, जो वायुमंडल के बाहर दुश्मन की मिसाइल को निशाना बनाता है, जबकि दूसरा एंडो-एटमॉस्फेरिक इंटरसेप्टर (Endo-Atmospheric Interceptor) है, जो वायुमंडल के भीतर मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
हालांकि केंद्र सरकार ने फिलहाल इन इंटरसेप्टर मिसाइलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें जल्द ही सेना के यूजर ट्रायल्स (User Trials) के लिए भेजा जाएगा।
पाकिस्तान की नई मिसाइल चुनौतियों का जवाब
सूत्रों के अनुसार, डीआरडीओ ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (Ballistic Missile Defence-BMD) कार्यक्रम को विशेष प्राथमिकता इसलिए दी है क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान लंबी दूरी की और मल्टीपल वॉरहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास पर काम कर रहा है।इनमें फतेह-1 (Fateh-I), फतेह-2 (Fateh-II) और चीन मूल की पी282 मिसाइल (P282 Missile) जैसी प्रणालियां शामिल हैं। भारत की नई मिसाइल रक्षा क्षमता को पाकिस्तान की इन तैयारियों के खिलाफ एक मजबूत और प्रभावी जवाब माना जा रहा है।
नौसेना को भी मिली बड़ी ताकत
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के सफल परीक्षणों के साथ ही डीआरडीओ ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (Naval Anti-Ship Missile-Medium Range-NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा किया है।इस परीक्षण ने मध्यम दूरी पर मिसाइल की अचूक मारक क्षमता को साबित कर दिया है। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों के समुद्री हमले के विकल्प और अधिक मजबूत हो गए हैं। यह सफलता भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता को भी नई मजबूती प्रदान करने वाली मानी जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुए परीक्षण
इन सभी महत्वपूर्ण परीक्षणों को डीआरडीओ और भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अंजाम दिया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने इन मिशनों की लगातार निगरानी की।उन्होंने 24 घंटे के भीतर इतने जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण परीक्षणों को सफल बनाने के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों, उद्योग भागीदारों और सशस्त्र बलों के बीच शानदार तालमेल की सराहना की। उन्होंने इसे भारत की रक्षा क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
देश की इस बड़ी सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी डीआरडीओ को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हवाई और समुद्री दोनों तरह के खतरों का मुकाबला करने की भारत की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाएगी।
रक्षा मंत्री के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और नेवल एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली में मिली यह सफलता देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में भारतीय सशस्त्र बलों को और अधिक सक्षम बनाएगी।
