Supreme Court Social Media Guidelines: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस

Supreme Court Social Media Guidelines: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस

Supreme Court Social Media Guidelines: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की ओर से दाखिल आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और कानून एवं न्याय मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी। हालांकि, इस ताजा आदेश को 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक के तौर पर देखना सही नहीं होगा। अदालत के सामने फिलहाल मुख्य मुद्दा सोशल मीडिया इंटरमीडियरी द्वारा बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी CSEAM की पहचान, हटाने और उसकी अनिवार्य रिपोर्टिंग से जुड़ा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी पर सवाल

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री की रिपोर्टिंग को लेकर अपने कानूनी दायित्वों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं। आवेदन में ऐसे मामलों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें कथित तौर पर सोशल मीडिया पर CSEAM को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन सामने आए। याचिका में केंद्र से एक समान Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करने की मांग की गई है। इसमें CSEAM की पहचान, तत्काल रिपोर्टिंग, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने, IP एड्रेस और अन्य डिजिटल जानकारी जांच एजेंसियों के साथ साझा करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की व्यवस्था शामिल करने की मांग है।

अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और डेटाबेस की मांग

ताजा आवेदन में यह भी मांग की गई है कि CSEAM से जुड़े लोगों की पहचान होने पर उनके विवरण को कानून के अनुसार National Database of Sexual Offenders (NDSO) में दर्ज किया जाए। इसके अलावा, किसी इंटरमीडियरी से रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां समयबद्ध तरीके से FIR, जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई करें। याचिका में एक केंद्रीकृत ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल बनाने की मांग भी की गई है, ताकि सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की जानकारी एक समान प्रक्रिया के तहत तुरंत दे सकें।

क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नए नियम आएंगे?

भारत में फिलहाल 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सामान्य प्रतिबंध लागू नहीं है। हालांकि, Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत बच्चों के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने के लिए सत्यापन योग्य अभिभावकीय सहमति का प्रावधान है। केंद्र सरकार नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र की सीमा और अतिरिक्त नियंत्रणों पर भी विचार कर चुकी है। फरवरी 2026 में सरकार की ओर से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियमों में बदलाव की संभावना पर चर्चा सामने आई थी। वहीं, अगस्त 2026 में बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा से जुड़े प्रस्तावित SHIELD Bill में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट के लिए सत्यापित अभिभावकीय सहमति, उम्र सत्यापन और पैरेंटल कंट्रोल जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए थे। यह फिलहाल प्रस्तावित कानून है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ा मुद्दा

सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबर बुलिंग, निजी डेटा के दुरुपयोग, अनुचित कंटेंट और यौन शोषण जैसे खतरे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का ताजा कदम प्लेटफॉर्म की कानूनी जवाबदेही और बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री की रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब सबकी नजर 24 सितंबर की सुनवाई पर है, जब केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले में अपना जवाब रखना है।

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