
US Senate: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा! अमेरिकी सीनेट ने ट्रंप को दिए कड़े प्रतिबंध लगाने के अधिकार
US Senate: भारत पर अमेरिकी टैरिफ का नया खतरा आ गया है। अमेरिकी सीनेट ने 28 जुलाई को भारी बहुमत से एक बड़े प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, जिसमें रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों – भारत और चीन समेत कई देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया गया है। इस विधेयक का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 रखा गया है।
अगर यह नया बिल पूरी तरह पास होकर लागू होता है और राष्ट्रपति छूट नहीं देते, तो भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात भारी झटका झेल सकता है, जिसका सीधा असर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, रत्न-आभूषण जैसे निर्यात-प्रधान क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
बिल में है क्या?
यह विधेयक रूसी अधिकारियों, रूस के कुलीन वर्ग, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ‘शैडो फ्लीट’ जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लगाता है। इसके साथ ही यह राष्ट्रपति ट्रंप को यह अधिकार भी देता है कि वे रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों के सामान पर 100 फीसदी तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगा सकें। इसके दायरे में सीधे तौर पर भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान आते हैं।
गौरतलब है कि यह बिल शुरू में 500 फीसदी टैरिफ के प्रस्ताव के साथ लाया गया था, जिसे बाद में घटाकर 100 फीसदी कर दिया गया। वैसे, इस बिल में राष्ट्रपति को इस टैरिफ को माफ करने या टालने का अधिकार भी दिया गया है, यानी टैरिफ अपने आप लागू नहीं होंगे और अंतिम फैसला ट्रंप प्रशासन पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बिल?
भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात जून 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसकी वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट के चलते खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में आई रुकावट थी। हालांकि अमेरिका ने भारत को अस्थायी छूट भी दी थी ताकि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रख सके। इसके बावजूद अमेरिका पहले ही अगस्त 2025 में भारत पर रूसी तेल गैस को लेकर अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लगा चुका है, जिससे कुल टैरिफ दर 50 फीसदी तक पहुंच गई थी। ये चीन और ब्राज़ील पर लगे सबसे ऊंचे शुल्क के बराबर था।
आगे क्या?
फिलहाल यह सिर्फ पहली प्रक्रियागत मंजूरी है। अभी बिल पर आगे बहस और अंतिम मतदान होना बाकी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की भी इसी दिन वॉशिंगटन में मौजूद थे और उन्होंने सीनेटरों से रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन मांगा था।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि बिल राष्ट्रपति को टैरिफ माफ करने या टालने की छूट देता है, यानी नई दिल्ली के पास कूटनीतिक बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की गुंजाइश अभी बनी हुई है।
