UP Cabinet Portfolio Distribution: लखनऊ से दिल्ली तक हलचल, योगी सरकार में हो सकता है बड़ा बदलाव

UP Cabinet Portfolio Distribution: लखनऊ से दिल्ली तक हलचल, योगी सरकार में हो सकता है बड़ा बदलाव

UP Cabinet Portfolio Distribution: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जबरदस्त हलचल है। योगी कैबिनेट के विस्तार को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन नए मंत्रियों की कुर्सियां तो सज गई हैं पर उनके पास अभी तक ‘काम’ (विभाग) नहीं है। विभागों के बंटवारे को लेकर बने इसी सस्पेंस के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ लंबी मंत्रणा की। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद अब यह माना जा रहा है कि यूपी में सिर्फ विभागों का बंटवारा ही नहीं होगा, बल्कि पूरी सरकार के स्वरूप में एक बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल देखने को मिल सकता है।

दिल्ली की दौड़ और मंत्रालय की लॉबिंग

रविवार को राजभवन में शपथ लेने वाले 6 नए मंत्रियों और प्रमोशन पाने वाले राज्य मंत्रियों की धड़कनें तेज हैं। पांच दिन का वक्त बीत जाने के बाद भी विभाग न मिलना उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई नए कयासों को जन्म दे रहा है। खबर है कि योगी मंत्रिमंडल के कई मंत्री इस वक्त दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। हर कोई चाहता है कि उसे ‘मलाईदार’ या कम से कम ऐसा विभाग मिले जिससे वह जनता और संगठन के बीच अपनी धमक दिखा सके। दिल्ली दरबार में मुख्यमंत्री की हाजिरी ने यह साफ कर दिया है कि विभागों की लिस्ट अब अंतिम चरण में है और आलाकमान की मुहर लगते ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा।

OBC-दलित समीकरण साधने में जुटी बीजेपी, नए मंत्रियों को मिल सकते हैं अहम विभाग

योगी सरकार ने इस कैबिनेट विस्तार में जिस ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का परिचय दिया है, उसे अमली जामा पहनाना अब बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती है। जिन 6 मंत्रियों ने शपथ ली है, उनमें से तीन ओबीसी और दो दलित समुदाय से हैं, जबकि एक ब्राह्मण चेहरा है। पार्टी के भीतर इस बात पर गहन मंथन चल रहा है कि इन मंत्रियों को केवल नाम के लिए मंत्री न बनाया जाए, बल्कि उन्हें ऐसे ‘पावरफुल’ पोर्टफोलियो सौंपे जाएं जिससे क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ एक मजबूत संदेश भी जाए। बीजेपी का लक्ष्य 2027 के महाकुंभ के लिए सत्ता की हैट्रिक लगाना है, और इसकी शुरुआत इन्हीं विभागों के सही चुनाव से होगी।

PWD पर टिकी सबकी निगाहें

पूरे सचिवालय में जिस एक विभाग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा और खींचतान है, वह है लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी)। जितिन प्रसाद के केंद्र में जाने के बाद से यह महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अपने पास रखा है। अब सवाल यह है कि क्या यह विभाग भूपेंद्र चौधरी को मिलेगा, जिन्होंने हाल ही में संगठन से सरकार में वापसी की है? या फिर क्या केशव प्रसाद मौर्य एक बार फिर पीडब्ल्यूडी के ‘बॉस’ बनेंगे? इस विभाग की संवेदनशीलता और बजट को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री इसे किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपेंगे जो विकास कार्यों में तेजी ला सके और जिसका ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग हो।

पुराने मंत्रियों का परफॉर्मेंस और मनोज पांडेय का कद

दिल्ली की बैठक में सिर्फ नए चेहरों पर ही बात नहीं हुई, बल्कि पुराने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों कई विभागों की समीक्षा की थी, जिसमें कुछ मंत्रियों के कामकाज से वे संतुष्ट नजर नहीं आए थे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि बेहतर काम करने वाले मंत्रियों का कद बढ़ाया जाएगा, जबकि सुस्त प्रदर्शन करने वालों की जिम्मेदारी कम की जा सकती है। इसके अलावा, सपा छोड़कर आए बागी विधायक मनोज पांडेय पर भी सबकी नजरें हैं।
अखिलेश सरकार में मंत्री रह चुके पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, ऐसे में उन्हें किसी भारी-भरकम विभाग की जिम्मेदारी मिलना लगभग तय माना जा रहा है।

मिशन-यूपी: नए कलेवर में तैयार होगी सरकार

दिल्ली में अमित शाह और नितिन नवीन के साथ मुख्यमंत्री योगी की मुलाकात महज शिष्टाचार नहीं थी। यह यूपी सरकार और संगठन को नए कलेवर में ढालने की कवायद है। बीजेपी अब एक ऐसे स्वरूप में आना चाहती है जो क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक समीकरणों को पूरी तरह साध सके। सस्पेंस की यह घड़ी अब खत्म होने वाली है। शाम तक या कल सुबह तक विभागों की वह सूची बाहर आ सकती है जो तय करेगी कि आगामी चुनाव में बीजेपी किस सेनापति को किस मोर्चे पर तैनात कर रही है।

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