
Agra News: प्रसव पीड़ा से तड़पती रही गर्भवती, दलदल में 4 घंटे फंसा ट्रैक्टर-ट्रॉली
ब्यूरोचीफ- शिवदत्त गोस्वामी, जिला -आगरा
Agra News: यमुना के बीहड़ में बसे बाह के सुंसार गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंचती, प्रसव पीड़ा होने पर ट्रैक्टर ट्रॉली से गर्भवती को अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। बृहस्पतिवार तड़के रामब्रज की पत्नी कृष्णा को प्रसव पीड़ा हुई, उसका चौथा प्रसव था। प्रसव पीड़ा से छटपटा रही गर्भवती को परिजनों ने ट्रॉली में बिठाया, बारिश से बचने के लिए तिरपाल तान लिया और प्रसव के लिए तड़के 4 बजे ट्रैक्टर से बाह सीएचसी के लिए निकले।
कीचड़ और दलदल भरे रास्ते पर ट्रैक्टर ट्रॉली फंस गये। पति रामब्रज, सोनू राजपूत, छोटू, शशिकांत, शीला देवी आदि ने बताया कि गांव के लोग फावड़े लेकर आए और कीचड़ को हटाकर फिसलन को रोकने के लिए सिल्ट डाली। फिसलन भरे रास्ते पर कई बार ट्रॉली पलटने से बची, प्रसूता एवं परिवार की महिलाओं की जान बचाने के लाले पड़ गये थे। करीब 4 घंटे की जद्दोजहद के बाद ट्रैक्टर ट्रॉली सुबह 8 बजे के करीब मंसूरपुरा की सड़क तक पहुंची।
दोपहर 2 बजे के करीब प्रसव का समय न होने की बात कहकर अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। लेकिन प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती को परिजन फतेहाबाद के निजी अस्पताल ले गये। आजादी के 79 साल बाद भी बाह के सुंसार गांव को सड़क नसीब नहीं हो सकी है। बीहड़ की पगडंडी के रास्ते आना जाना गांव के लोगों की नियत बन गई है। बारिश के मौसम में बीहड़ी रास्ते पर कीचड़ और दलदल में बाइक से निकलना मुश्किल हो जाता है।
आजादी के 79 साल बाद भी नहीं बन सकी सुंसार की सड़क, किए चुनाव बहिष्कार और आंदोलन।
आजादी के 79 वसंत बीत गए, बाह के सुंसार गांव में यमुना के बीहड़ के करीब 4 किमी के रास्ते पर सड़क नहीं बन सकी है। सड़क के लिए 2014 और 2024 में लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार किया। कई आंदोलन किए, नतीजा सिफर रहा है। 1500 की आबादी वाले सुंसार गांव में 619 मतदाता हैं। मंसूरपुरा से गांव तक पहुंचने के लिए बीहड़ी रास्ता है।
गांव के पूर्व प्रधान पुत्तूलाल, रघुनाथ ने बताया कि तीन पीढियों से किसी ने सड़क नहीं देखी है। प्रताप सिंह, राजपाल, वीरपाल, श्यामवीर, सत्यपाल, भीकम सिंह, परमसुख, कल्याण सिंह, भीमसैन, राजेश कुमार, शशी कपूर, मदन गोपाल, महेश, कमलेश, लालू, उमेश, लोकनाथ, शांतिलाल, जोगेंद्र, टिंकू, लीलाधर आदि परिवार जरार में बस गये हैं। सांसद राजकुमार चाहर ने गांव में चौपाल लगाई, उसके बाद रास्ते का सर्वे हुआ तो सड़क नसीब होने की उम्मीद जगी थी। पुत्तूलाल, शिवशंकर, बचन सिंह, नानकराम कहते हैं कि सड़क बन जाए तभी यकीन होगा।
