Banda News: बांदा में 33 करोड़ की स्टोन पिचिंग पहली ही बाढ़ में बह गई, उठे भ्रष्टाचार के सवाल

Banda News: बांदा में 33 करोड़ की स्टोन पिचिंग पहली ही बाढ़ में बह गई, उठे भ्रष्टाचार के सवाल

Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के यमुना पट्टी के तिहरार क्षेत्र में स्थित इछावर, बसुधरी और लसड़ा गांवों में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए बनाई गई 33 करोड़ रुपये की स्टोन पिचिंग एक ही वर्ष में बह जाने से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना में भारी अनियमितताएं, गुणवत्ता की अनदेखी और कथित भ्रष्टाचार के कारण करोड़ों रुपये का कार्य पूरी तरह असफल साबित हुआ।

वर्ष 2023-24 में जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद की मांग पर यमुना किनारे बसे इन गांवों को कटान से बचाने के लिए यह परियोजना स्वीकृत की गई थी। सिंचाई विभाग को इसका जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में शुरू से ही लापरवाही और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा बिना उचित ढाल बनाए सीधे खड़ी पिचिंग तैयार की गई। साथ ही बोरियों में मिट्टी भरकर सही तरीके से स्लोप तैयार नहीं किया गया, जिससे संरचना कमजोर रह गई। निर्माण के दौरान ही ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर विरोध किया था और कई बार प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पहली बारिश में उजड़ा गांव का सहारा

पहली ही बाढ़ में पूरी स्टोन पिचिंग यमुना नदी में बह गई। जो हिस्सा बचा है, वह भी पूरी तरह दरक चुका है और किसी भी समय टूटकर गांवों को खतरे में डाल सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह काम न कराया जाता तो प्राकृतिक कटान धीरे-धीरे होता, जिससे नुकसान कम होता।
इछावर गांव की स्थिति सबसे ज्यादा भयावह बताई जा रही है। यहां नदी किनारे स्थित सैकड़ों वर्ष पुराना मंदिर, कुआं और पीपल का वृक्ष भी इस परियोजना के चलते नष्ट हो गया। पहले जहां ग्रामीण यमुना में स्नान करते थे और जानवरों को पानी पिलाते थे, अब वहां पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि अब अंतिम संस्कार के लिए भी यमुना किनारे जाना संभव नहीं है क्योंकि वहां न रास्ता बचा है और न ही कोई सुरक्षित घाट बनाया गया है।

भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे प्रोजेक्ट में सिंचाई विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से जमकर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि पैसों का खुलेआम बंदरबांट किया गया, जिसका खामियाजा अब गांव के लोग भुगत रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद के अपने क्षेत्र में ही यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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