
Bangladeshi Deportation Plan: बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा, मालदा-मुर्शिदाबाद में सेंटर शुरू
Bangladeshi Deportation Plan: भारतीय जनता पार्टी देश भर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी अवैध घुसपैठ, विशेष रूप से बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे को लगातार उठाती रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने सत्ता में आने पर इन घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का वादा किया था। इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए अब बीजेपी सरकार ने राज्य के सभी जिलों में होल्डिंग (डिटेंशन) सेंटर बनाने का आदेश जारी किया है। शुभेंदु अधिकारी की सरकार द्वारा निर्देश दिए जाने के महज 48 घंटों के भीतर बांग्लादेश सीमा से सटे मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में ऐसे दो सेंटर क्रियान्वित भी कर दिए गए हैं, जहां फिलहाल करीब एक दर्जन संदिग्ध लोगों को रखा गया है।
इससे पहले राज्य सरकार ने सभी 23 जिलों के जिलाधिकारियों को ऐसे स्थानों की पहचान करने और व्यवस्था करने को कहा था ताकि अवैध विदेशी व रोहिंग्या नागरिकों को वहां रखा जा सके। बाकी के जिलों में भी इसके लिए उपयुक्त जगहों की तलाश जारी है।
सोमवार को मालदा में पकड़े गए नौ और मुर्शिदाबाद में पकड़े गए तीन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को इन नवनिर्मित केंद्रों में भेज दिया गया है। वर्तमान में इन लोगों को केवल संदेह, पूछताछ और प्राथमिक जांच के आधार पर यहां रखा गया है। अब इनके दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी और बांग्लादेश सरकार से भी इनकी नागरिकता की पुष्टि कराई जाएगी, जिसके बाद ही इन 12 या अन्य लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस बार की कानूनी प्रक्रिया में एक नया बदलाव देखा गया है। हिरासत में लिए गए इन 12 लोगों को न तो अदालत के समक्ष पेश किया गया है और न ही उनकी औपचारिक गिरफ्तारी हुई है। पहले ऐसे मामलों में फॉरेनर्स ऐक्ट 1946 की धारा 14 के तहत गिरफ्तारी की जाती थी, लेकिन इस बार अधिकारियों का पूरा ध्यान पहले यह सुनिश्चित करने पर है कि ये लोग किस देश के मूल निवासी हैं। जैसे ही इनके बांग्लादेशी होने की पुष्टि हो जाएगी, इन्हें 30 दिनों के भीतर वापस भेज दिया जाएगा। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 मई 2025 को एक गाइडलाइन जारी कर अवैध विदेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया तय की थी। एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पश्चिम बंगाल में इसे लागू नहीं किया जा सका था, जिसे अब वर्तमान सरकार अमलीजामा पहना रही है।
इन केंद्रों की सुरक्षा और व्यवस्था को बेहद कड़ा रखा गया है। मालदा के इंग्लिश बाजार में स्थित स्वयं सहायता समूहों के एक सरकारी ट्रेनिंग सेंटर की इमारत की पहली मंजिल को होल्डिंग सेंटर का रूप दिया गया है। यहां सुरक्षा के लिए 12 पुलिसकर्मी, सिविल डिफेंस के तीन कर्मी और तीन सिविक वॉलंटियर तैनात किए गए हैं, साथ ही सीसीटीवी कैमरों और रसोइयों का भी प्रबंध किया गया है। सोमवार को यहाँ रखे गए नौ लोगों को गजोल पुलिस स्टेशन की पांडुआ पुलिस ने हिली सीमा क्षेत्र से बिना वैध दस्तावेजों के प्रवेश करते हुए पकड़ा था।
पूछताछ में इन लोगों ने स्वीकार किया है कि वे बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के मीठापुकुर थाना क्षेत्र के इमामपुर गांव के निवासी हैं। इसी तरह, मुर्शिदाबाद के लालगोला में मत्स्य पालन विभाग के ‘पद्म भवन’ की दूसरी मंजिल पर एक और होल्डिंग सेंटर बनाया गया है, जहाँ शनिवार को सीमा के पास से फर्जी भारतीय पासपोर्ट, नकली EPIC आईडी और अन्य जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गए तीन लोगों को रखा गया है। आने वाले दिनों में राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे सेंटर तैयार किए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में हर जिले से मासिक रिपोर्टिंग का नियम भी तय किया है, जिससे साफ है कि सरकार हर अवैध विदेशी नागरिक को वापस भेजने के अपने रुख पर सख्ती से आगे बढ़ रही है।
