
Delhi Health Department Scam: 650 करोड़ के मेडिकल उपकरण घोटाले का खुलासा, ACB की बड़ी कार्रवाई
Delhi Health Department Scam: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों और जीवन रक्षक उपकरणों की खरीद को लेकर एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। करीब 650 करोड़ रुपये के इस हाई-प्रोफाइल चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने अब तक की सबसे बड़ी और आक्रामक कार्रवाई की है।
जांच एजेंसी ने दिल्ली की पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी से दिल्ली के प्रशासनिक और राजनीतिक हल्कों में जबरदस्त हड़कंप मच गया है।
डिप्टी कंट्रोलर नीरज चोपड़ा भी पहुंचे सलाखों के पीछे
एसीबी की तफ्तीश का दायरा केवल पूर्व महानिदेशक तक ही सीमित नहीं रहा। जांच टीम ने विभाग में हुए इस भारी वित्तीय हेरफेर में शामिल डिप्टी कंट्रोलर अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को भी दबोच लिया है। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के आला अधिकारियों का मानना है कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और चहेती कंपनियों को फायदा देने में इन दोनों आला अफसरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। आपको बता दें कि एसीबी इस महा-घोटाले में केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिन्हें अदालत ने 4 दिन की कड़ी पुलिस रिमांड पर भेजा है।
7 स्वास्थ्य कर्मी तत्काल सस्पेंड
इस बड़े वित्तीय घोटाले के उजागर होते ही दिल्ली सरकार के भीतर भी हड़कंप मच गया है। केंद्रीय खरीद एजेंसी के अलग-अलग सरकारी गोदामों की औचक जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और हेरफेर पाई गई। इसके तुरंत बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए 5 फार्मासिस्टों और 2 बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से सस्पेंड कर दिया है। इन सभी पर दवाओं की सरकारी खरीद, उनके रखरखाव और पूरे प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप है। हालांकि, जांच प्रभावित न हो इसलिए सरकार ने अभी तक निलंबित हुए कर्मियों के नामों का खुलासा नहीं किया है।
टेंडर प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला दिल्ली सरकार के विभिन्न अस्पतालों के लिए सर्जिकल सामान, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य सामग्रियों की खरीद में हुए कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है। एसीबी की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने मिलकर टेंडर के नियमों में जमकर हेरफेर की। बाजार की वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दामों पर सामान खरीदा गया और जिन मेडिकल उपकरणों की अस्पतालों में कोई जरूरत ही नहीं थी, उन्हें भी भारी बजट ठिकाने लगाने के लिए जबरन मंगवाया गया। इस खेल में कुछ खास वेंडरों को अवैध रूप से फायदा पहुंचाया गया।
हिरासत में लिए गए वेंडरों से पूछताछ जारी
इस 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए एसीबी की कई टीमें स्वास्थ्य विभाग के मौजूदा कर्मचारियों और खरीद प्रक्रिया का हिस्सा रहे निजी वेंडरों को हिरासत में लेकर लगातार पूछताछ कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी टेंडर को मंजूरी देने वाली फाइलों, उपकरणों की सप्लाई के बदले हुए भुगतानों और संदिग्ध कंपनियों के बैंक खातों की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस कार्रवाई पर साफ कहा है कि सरकार भ्रष्टाचार पर पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी और जनता के पैसे को लूटने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
