
CJP Women Protesters News: छात्र आंदोलन में शामिल महिला प्रदर्शनकारियों पर विवादित टिप्पणियों से मचा बवाल
CJP Women Protesters News: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पूरे 36 दिनों तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन ने देश की सत्ता को हिलाकर रख दिया। NEET-UG परीक्षा में हुई भयंकर धांधली और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की पुरजोर मांग को लेकर देश भर के हजारों युवा सड़कों पर उतरे थे। इस ऐतिहासिक जन-आंदोलन की प्रचंड ताकत का ही नतीजा था कि अंततः शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, आंदोलन की इस अभूतपूर्व सफलता के बाद अब एक नया और दुखद विवाद छिड़ गया है। आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में खड़ी होकर हुंकार भरने वाली देश की बेटियों और युवा छात्राओं के खिलाफ समाज के कुछ जाने-माने चेहरों और नेताओं ने बेहद अपमानजनक और शर्मनाक टिप्पणियां की हैं, जिससे पूरे देश में भारी जनाक्रोश पनप रहा है।
कंगना रनौत का विवादित बयान
भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबी स्टोरी पोस्ट करके इस पूरे विवाद को जन्म दिया। कंगना ने आंदोलन में शामिल होने वाली देश की नई पीढ़ी की महिलाओं को सीधे ‘गटर जेनरेशन’ तक कह डाला। उन्होंने लिखा कि ये युवा भारतीय लड़कियां नशा करने, शराब पीने और अनगिनत यौन संबंधों को ही अपनी असली आजादी मान बैठी हैं। कंगना ने आगे लिखा कि ये लड़कियां न तो पढ़ाई-लिखाई में अच्छी हैं और न ही भविष्य में कभी एक अच्छी गृहिणी बन सकती हैं।
कंगना के इस बयान की चौतरफा तीखी आलोचना हो रही है। उन्होंने आगे लिखा कि ये वही लड़कियां हैं जिनके जीवनसाथी विदेशी होते हैं और ये किसी पालतू जानवर की तरह बाहर से संचालित होती हैं। कंगना का यह बयान कई मायनों में बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इसने आंदोलन के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर सीधे देश की बेटियों के चरित्र और नीयत पर उंगली उठाने का काम किया है।
BJP नेता टी. जी. मोहनदास की घटिया टिप्पणी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे घिनौना और शर्मनाक बयान बीजेपी नेता टी. जी. मोहनदास की तरफ से आया। उन्होंने सड़कों पर हक के लिए लड़ रही बेटियों की तुलना सीधे वेश्याओं से कर दी। मोहनदास ने कहा कि सड़कों पर हंगामा करने वाली ये लड़कियां शिक्षा की आड़ में क्या कर रही हैं और इनकी कैसी परवरिश हुई है।
इस बेहद स्त्री-विरोधी बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में बवंडर आ गया। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के राज्य महासचिव वीएम अलियार ने मोहनदास के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज करने की जोरदार मांग उठाई है। अलियार ने आरोप लगाया कि मोहनदास ने दावा किया है कि प्रदर्शन में शामिल धर्मनिरपेक्ष लड़कियां सामूहिक दुष्कर्म का मजा लेती हैं। यह टिप्पणी केवल घटिया ही नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहुत बड़ा प्रहार है।
मीनाक्षी भराला का आरोप
महिला आयोग की प्रमुख सदस्य मीनाक्षी भराला ने भी आंदोलनकारी छात्राओं को कटघरे में खड़ा किया। बागपत कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे कई वीडियो फुटेज देखे हैं जिनमें छात्र तो गालियां दे ही रहे थे, लेकिन छात्राएं उनसे भी ज्यादा अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन मर्यादाओं की सीमा लांघना कतई स्वीकार्य नहीं है। मीनाक्षी भराला के इस बयान ने सीधे तौर पर बेटियों के आचरण को कटघरे में खड़ा कर दिया।
अनुपम खेर ने जताई भाषा की मर्यादा पर गहरी नाराजगी
वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर ने भी इस विषय पर अपना एक वीडियो संदेश साझा किया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर बेटियों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन उन्होंने प्रदर्शन के दौरान देश के प्रधानमंत्री के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर सख्त ऐतराज जताया। अनुपम खेर ने कहा कि जिस तरह की भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया, उससे उनका मन बेहद दुखी हुआ है। जब बड़े ही शिष्टाचार भूल जाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी से कैसे अच्छे संस्कारों की उम्मीद की जा सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले अनुपम खेर ने इस छात्र आंदोलन का खुलकर समर्थन किया था और इसे समाज की सबसे पवित्र आवाज बताया था, लेकिन बाद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त की।
बयानों के पीछे का छुपा हुआ पैटर्न
यदि इन सभी बड़े चेहरों की बयानबाजी का बारीकी से विश्लेषण किया जाए, तो इसके पीछे एक बहुत ही साफ पैटर्न नजर आता है। समाजशास्त्रियों और महिला अध्ययन के विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति ‘वुमन ब्लेमिंग’ यानी महिलाओं को ही दोषी ठहराने का पुराना तरीका है। जब भी देश की बेटियां सड़कों पर उतरकर सरकार और तंत्र से तीखे सवाल पूछती हैं, तो मुख्य मुद्दों जैसे NEET घोटाला, पेपर लीक और भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उनके पहनावे, भाषा, देर रात तक बाहर रहने और चरित्र पर कीचड़ उछाला जाता है। 2024 के कोलकाता डॉक्टर प्रोटेस्ट से लेकर 2025 के छात्र आंदोलनों तक, हर बार महिला प्रदर्शनकारियों को ही सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है ताकि पूरे आंदोलन को ही बदनाम किया जा सके।
पुलिसिया बर्बरता और बेटियों का अदम्य साहस
CJP आंदोलन में बेटियों ने केवल बयानबाजी का ही दर्द नहीं झेला, बल्कि उन्हें पुलिस की बर्बरता का भी सामना करना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं में वरिष्ठ वकीलों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि प्रदर्शन के दौरान महिला छात्रों के साथ पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की। एक चर्चित वीडियो में तो एडीजीपी संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए थे, जिसके बाद उन्हें वहां से हटाया गया था। तमाम प्रशासनिक प्रताड़ना और चरित्र हनन के बावजूद देश की इन निडर बेटियों ने यह साबित कर दिया कि वे अपने हक और देश के बेहतर भविष्य के लिए किसी भी अन्याय के आगे झुकने वाली नहीं हैं।
