Lucknow Aliganj Fire Update: लखनऊ के अलीगंज में भीषण अग्निकांड,15 लोगों की जिंदा जलकर मौत, 5 महिलाएं भी शामिल

Lucknow Aliganj Fire Update: लखनऊ के अलीगंज में भीषण अग्निकांड,15 लोगों की जिंदा जलकर मौत, 5 महिलाएं भी शामिल

Lucknow Aliganj Fire Update: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुए दिल दहला देने वाले भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 5 महिलाओं समेत कम से कम 15 बेकसूर लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई।
शुरुआती जांच के मुताबिक, इस भीषण आग की शुरुआत एक पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) के भीतर लगे एयर कंडीशनर (AC) में हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई थी।

लेकिन राहत और बचाव कार्य में जुटे फायर ब्रिगेड के जवानों और अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतों की असली वजह सिर्फ शॉर्ट सर्किट नहीं थी। यह हादसा दरअसल कई ढांचागत कमियों और सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का नतीजा था, जिसने हंसती-खेलती बहुमंजिला इमारत को पल भर में ‘मौत के कुएं’ में तब्दील कर दिया। विशेषज्ञों ने इसे एक ऐसा बड़ा खतरा बताया जो कभी भी सामने आ सकता था।

धुएं और जहरीली गैसों ने नहीं दिया संभलने का मौका

इस बहुमंजिला इमारत के भीतर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर कई तरह के व्यवसाय एक साथ चलाए जा रहे थे। इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहले फ्लोर पर जानवरों की दुकान और एक पशु चिकित्सालय मौजूद था। वहीं, इसके ठीक ऊपर दूसरे फ्लोर पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम की एक लाइब्रेरी और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नाम की एक गेमिंग और एनिमेशन कंपनी चल रही थी, जहां सैकड़ों छात्र स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग लेने आते थे।

जांच में पता चला है कि इस पूरी इमारत को मूल रूप से रहने के लिए यानी एक रिहायशी मकान के तौर पर पास कराया गया था, लेकिन बाद में बिना सुरक्षा नियमों को अपग्रेड किए इसे पूरी तरह व्यावसायिक परिसर में बदल दिया गया। वरिष्ठ सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इमारत में खिड़कियों और वेंटिलेशन (हवा आने-जाने के रास्ते) की भारी कमी थी, जिसके कारण आग लगते ही पूरी बिल्डिंग में चंद मिनटों में दम घोंटू धुएं और जहरीली गैसों का एक जानलेवा गुबार जमा हो गया, जिससे लोग बेहोश होने लगे।

कबाड़ और प्लास्टिक ने भड़काई आग की लपटें

इस हादसे की सबसे खौफनाक बात यह रही कि इमारत की ऊपरी मंजिल पर बनी एनिमेशन कंपनी के मुख्य दरवाजे पर एक बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान मांगने वाला) ऑटो-लॉक सिस्टम लगा हुआ था। हादसे के समय वहां से जिंदा बचकर निकले यश नाम के एक कर्मचारी ने बताया कि जैसे ही नीचे से आग फैली, बिजली कटने के कारण वह मुख्य डिजिटल गेट पूरी तरह से लॉक हो गया।

छात्र और कर्मचारी अंदर ही फंस गए और उस बंद गेट को खोलने की जद्दोजहद में बेहद कीमती समय बर्बाद हो गया। इसके साथ ही हर मंजिल पर भारी मात्रा में ज्वलनशील सामान जैसे जानवरों का प्लास्टिक पैक खाना, लकड़ी के बने पार्टीशन, दफ्तर का फर्नीचर, बिजली के तार और सजावटी सामान ठसाठस भरे हुए थे, जिसने आग में घी का काम किया।

इस भयंकर तबाही की पहली भनक मरजीना नाम की एक सफाई कर्मचारी को लगी, जिसने इमारत से धुंआ निकलते देखा और लोगों की चीखें सुनीं, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया।

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