
Ram Mandir Donation Scam: राम भक्तों के चंदे में सेंध, SIT रिपोर्ट के बाद 8 पर FIR, सभी आरोपी हिरासत में
Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य और पवित्र श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बहुत बड़े चंदा चोरी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरे मामले में विशेष जांच टीम यानी एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के ठीक 2 दिन बाद 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। राम मंदिर ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य श्री कृष्ण मोहन ने जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर यह बड़ा मुकदमा दर्ज कराया है, जिसके तुरंत बाद एक्शन में आई अयोध्या पुलिस ने सभी आरोपियों को अपनी कस्टडी में ले लिया है।
इन जालसाजों के खिलाफ नए कानून बीएनएस की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 13(1)(a) के तहत बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। ऐसे में देश भर के राम भक्तों के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर पवित्र मंदिर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को धेंध लगाकर चोरी करने वाले इन 8 लोगों का असली रोल क्या था?
बेरोकटोक घूमने वाला खास टिन्नू यादव
इस पूरे घोटाले का सबसे मुख्य और चौंकाने वाला किरदार रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव है। टिन्नू यादव कोई साधारण शख्स नहीं है, बल्कि वह राम मंदिर ट्रस्ट के बेहद शक्तिशाली महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर और बेहद करीबी रहा है। मंदिर परिसर के भीतर उसका रसूख इस कदर था कि वह अकेला ऐसा व्यक्ति था जो सुरक्षा घेरे को पार कर कहीं भी बेरोकटोक आ-जा सकता था। उसकी बुलेट मोटरसाइकिल सीधे मंदिर के अंदर जाकर खड़ी होती थी। टिन्नू का मुख्य काम श्रद्धालुओं को दर्शन कराना, जनसुविधाओं की देखरेख करना और सबसे महत्वपूर्ण रूप से दानपात्रों की सुरक्षा करके उन्हें बेसमेंट तक सुरक्षित पहुंचाना था।उसने अपने इसी वीआईपी दर्जे का फायदा उठाकर आस्था के खजाने में बड़ी सेंध लगाई।
नोटों की गिनती के इंचार्ज और वाउचर का खेल
इस घिनौने खेल में पैसों का हिसाब-किताब रखने के लिए बड़े चेहरों का इस्तेमाल किया गया था। चंदा चोरी के आरोप में फंसा सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का एक रिटायर्ड कर्मचारी है, जिसे बैंक के तजुर्बे के कारण राम मंदिर के कैश काउंटिंग सेंटर का बड़ा इंचार्ज बनाया गया था। नोट गिनने वाले पूरे स्टाफ की निगरानी उसी के जिम्मे थी। वहीं दूसरी तरफ अनुकल्प मिश्रा नाम का आरोपी पिछले 2 साल से लगातार गणना कक्ष में नोट गिनने का काम कर रहा था। श्रद्धालुओं की मदद के लिए बने सुविधा केंद्र में तैनात अनुकल्प पर आरोप है कि वह दान में आने वाले रुपयों के सरकारी वाउचर में भारी हेराफेरी करता था।
नकली नोटों की आड़ में असली की चोरी
इस पूरे रैकेट का सबसे शातिर दिमाग मनीष यादव था। मनीष यादव को मंदिर प्रशासन की तरफ से यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह दानपात्रों में आने वाले नकली नोटों को पहचानकर उन्हें गिनकर अलग रखे। लेकिन मनीष ने इसी जिम्मेदारी की आड़ में एक बड़ा खेल शुरू कर दिया। वह नकली नोटों को अलग करने के बहाने दान की भारी-भरकम असली रकम को ही गायब कर देता था। इस तरह इन सभी 8 लोगों ने मिलकर रामलला के खजाने को करोड़ों का चूना लगाया, जिसका सच अब जाकर दुनिया के सामने आया है।
