
SC on Rahul Gandhi Case: सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के बयान पर सुनवाई, कोर्ट में हुई तीखी बहस
C on Rahul Gandhi Case: देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े एक अहम मामले पर आज सुनवाई हुई। यह पूरा विवाद राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ा है, जो उन्होंने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के समय दिया था। उस दौरान उन्होंने भारतीय सेना और चीनी सैनिकों की झड़प को लेकर कुछ बातें कही थीं। इस बयान के खिलाफ कोर्ट में क्रिमिनल केस दायर किया गया था। अब इसी कानूनी कार्रवाई को रद्द कराने के लिए राहुल गांधी ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में इस याचिका पर दोनों पक्षों के बीच काफी बहस देखने को मिली।
वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया की कोर्ट से खास अपील
सुनवाई के समय शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से देश के माने-जाने वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया अदालत में हाजिर हुए। उन्होंने जजों की बेंच के सामने अपनी बात बहुत मजबूती से रखी। वकील गौरव भाटिया ने चीफ जस्टिस से मांग की कि इस केस की गंभीरता को देखते हुए इसे बाकी सामान्य मुकदमों से अलग किया जाए और इस पर तुरंत सुनवाई की जाए। उन्होंने अदालत का ध्यान इस बात की तरफ भी खींचा कि यह मामला काफी समय से लटका हुआ है। जब भी कोर्ट की तरफ से तारीख तय की जाती है, तो याचिकाकर्ता किसी न किसी वजह से हाजिर नहीं होते, जिससे बार-बार सुनवाई टल जाती है।
राहुल गांधी कोई वीवीआईपी नहीं, अलग से हो सुनवाई
शिकायतकर्ता के वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट में अपनी दलील को आगे बढ़ाते हुए काफी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लगभग पांच महीने पहले भी यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन उस समय भी किसी वजह से इस पर फैसला या चर्चा नहीं हो सकी थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि देश का कानून सबके लिए एक जैसा है और राहुल गांधी कोई बहुत खास व्यक्ति या वीवीआईपी नहीं हैं। इसलिए इस मामले में किसी तरह की ढील नहीं मिलनी चाहिए और इसे स्वतंत्र रूप से अलग करके जल्द निपटाया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस का करारा जवाब, नियम सबके लिए एकगौरव भाटिया की इस मांग पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) ने बहुत ही साफ और सख्त रुख दिखाया। चीफ जस्टिस ने अदालत का नियम याद दिलाते हुए कहा कि न्याय के मंदिर में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता। कोर्ट की नजर में हर पक्ष और हर नागरिक बिल्कुल एक समान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत सिर्फ और सिर्फ कानून की तय की गई प्रक्रिया के हिसाब से ही काम करेगी। किसी भी मामले को बिना नियम-कायदों के सीधी प्राथमिकता नहीं दी जा सकती, चाहे सामने कोई भी बड़ा नाम क्यों न हो।
नियमित आवेदन के बाद ही अगली कार्रवाई
चीफ जस्टिस ने वकील गौरव भाटिया को निर्देश दिया कि अगर वे इस केस की जल्दी सुनवाई चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए नियम के अनुसार एक औपचारिक आवेदन (एप्लीकेशन) दायर करना होगा। जब वह सही तरीका अपनाकर आवेदन जमा करेंगे, तब कोर्ट उस पर विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि कोर्ट किसी भी मामले में जल्दबाजी नहीं करेगा और सभी केसों को अपनी बारी आने पर ही सुना जाएगा।
