UP RERA Property Buying Tips 2026: फर्जी प्रोजेक्ट और विवादित जमीन से बचें, UP-RERA ने खरीदारों को किया आगाह

UP RERA Property Buying Tips 2026: फर्जी प्रोजेक्ट और विवादित जमीन से बचें, UP-RERA ने खरीदारों को किया आगाह

UP RERA Property Buying Tips 2026: अपना एक आशियाना बनाना हर किसी की चाहत होती है। यही वजह है कि अब हाउसिंग सोसाइटी के बढ़ते ट्रेंड के साथ तेजी से शहरीकरण का विस्तार होता जा रहा है। ख़ासतौर से कृषिप्रधान उत्तर प्रदेश में घर, फ्लैट या जमीन खरीदना आज सिर्फ एक सपना नहीं बल्कि बड़ा निवेश बन चुका है।

लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर संपत्ति खरीदते हैं, लेकिन कई बार थोड़ी सी लापरवाही उन्हें धोखाधड़ी, कोर्ट-कचहरी और आर्थिक नुकसान के जाल में फंसा देती है। फर्जी दस्तावेज, विवादित जमीन, बिना अनुमति के बने प्रोजेक्ट और बैंक में गिरवी रखी संपत्तियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (UP-RERA) और राज्य सरकार लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

यूपी रेरा ने साफ कहा है कि कोई भी संपत्ति खरीदने से पहले खरीदारों को पांच अहम बिंदुओं की गहराई से जांच करनी चाहिए। अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो न केवल ठगी से बचा जा सकता है बल्कि भविष्य में कानूनी परेशानियों से भी राहत मिल सकती है।

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सबसे पहले जांचें खतौनी और खसरा का रिकॉर्ड

जमीन खरीदते समय सबसे जरूरी काम उसके असली मालिक की पहचान करना होता है। कई बार लोग फर्जी दस्तावेज दिखाकर दूसरों की जमीन बेच देते हैं। ऐसे मामलों में खरीदार बाद में कानूनी विवाद में फंस जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्री से पहले खतौनी और खसरा रिकॉर्ड का मिलान अनिवार्य कर दिया है। खरीदार को यह देखना चाहिए कि विक्रेता का नाम वास्तव में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। यह जानकारी यूपी भूलेख पोर्टल पर आसानी से देखी जा सकती है। भूमि का रिकॉर्ड जांचते समय यह भी देखना जरूरी है कि जमीन कृषि भूमि है या आवासीय। कई बार कृषि भूमि को बिना अनुमति के प्लॉटिंग करके बेच दिया जाता है, जिससे बाद में निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आती हैं।

पैन कार्ड के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री

संपत्ति खरीद-बिक्री में काले धन और बेनामी संपत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया है। अब खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पैन कार्ड जरूरी है। बिना पैन कार्ड के रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।

विशेषज्ञों का कहना है कि पैन कार्ड के जरिए ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और भविष्य में टैक्स या कानूनी विवाद की स्थिति में पारदर्शिता बनी रहती है। इसलिए खरीदारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी दस्तावेजों में सही पैन नंबर दर्ज हो।

रेरा रजिस्ट्रेशन जांचना बेहद जरूरी

यदि कोई व्यक्ति फ्लैट, अपार्टमेंट या कॉलोनी में प्लॉट खरीद रहा है तो उसे सबसे पहले यह देखना चाहिए कि प्रोजेक्ट यूपी रेरा में रजिस्टर्ड है या नहीं। कई बिल्डर बिना मंजूरी के प्रोजेक्ट लॉन्च कर देते हैं और बाद में खरीदारों का पैसा फंस जाता है। यूपी रेरा की वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर आसानी से चेक किया जा सकता है। वहां यह जानकारी भी मिल जाती है कि प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ, कब पूरा होना है और उसके खिलाफ कितनी शिकायतें दर्ज हैं। रेरा ने खरीदारों को यह भी सलाह दी है कि केवल विज्ञापन और आकर्षक ऑफर देखकर निवेश न करें। वेबसाइट पर उपलब्ध परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट भी जरूर देखें। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि निर्माण कार्य समय पर चल रहा है या नहीं।

भूमि का स्वामित्व और कानूनी स्थिति समझना जरूरी

संपत्ति खरीदने से पहले यह देखना बहुत जरूरी है कि जमीन का स्वामित्व कानूनी रूप से वैध है या नहीं। कई बार जमीन पर पुराने विवाद, कब्जे या कोर्ट केस चल रहे होते हैं, जिनकी जानकारी खरीदार को नहीं दी जाती। यूपी रेरा ने स्पष्ट कहा है कि खरीदारों को यह जांच करनी चाहिए कि जमीन पर किसी बैंक का कर्ज, सरकारी बकाया या कानूनी दावा तो नहीं है। इसके लिए स्थानीय तहसील या सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से पिछले 10 से 15 वर्षों का रिकॉर्ड निकलवाना चाहिए।

इसे एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) कहा जाता है। इससे पता चल जाता है कि संपत्ति बैंक में गिरवी तो नहीं है और उसके खिलाफ कोई कानूनी विवाद लंबित तो नहीं चल रहा।

नक्शा और लेआउट प्लान जरूर देखें

आजकल कई कॉलोनियां और अपार्टमेंट ऐसे बन रहे हैं जिनके नक्शे को संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी ही नहीं मिली होती। बाद में ऐसे निर्माणों पर कार्रवाई होने लगती है और खरीदार परेशान हो जाते हैं। खरीदार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिल्डर द्वारा दिखाया गया नक्शा और लेआउट प्लान सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत हो। मौके पर जो निर्माण कार्य दिखाया जा रहा है, वह स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही होना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक पार्क, सड़क, सीवर, बिजली और अन्य सुविधाओं की जानकारी भी पहले ही जांच लेनी चाहिए ताकि भविष्य में मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना न करना पड़े।

बैनामा और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को नजरअंदाज न करें

कई लोग रजिस्ट्री कराने के बाद यह मान लेते हैं कि वे कानूनी रूप से मालिक बन चुके हैं, जबकि वास्तविक स्वामित्व के लिए दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन कराना भी जरूरी होता है। दाखिल-खारिज के जरिए सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती तो भविष्य में संपत्ति पर अधिकार साबित करने में समस्या आ सकती है। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि विक्रेता के पास संपत्ति का असली और वैध बैनामा मौजूद हो। दस्तावेजों की जांच किसी अनुभवी वकील से जरूर करानी चाहिए।

इनवेंट्री विवरण का भी करें मिलान

यदि कोई व्यक्ति प्लॉट, दुकान या फ्लैट खरीद रहा है तो उसे यह भी जांचना चाहिए कि जिस यूनिट को वह खरीदना चाहता है उसका विवरण पोर्टल पर उपलब्ध है या नहीं। कई बार एक ही यूनिट को कई लोगों को बेच दिया जाता है। यूपी रेरा ने सलाह दी है कि खरीदार प्रोजेक्ट की इनवेंट्री जानकारी का मिलान करें। इससे यह पता चल जाता है कि कुल कितने फ्लैट, दुकान या प्लॉट उपलब्ध हैं और कौन-सी यूनिट पहले से बुक है।

ऐसे करें यूपी रेरा वेबसाइट पर जांच

यूपी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर खरीदार आसानी से प्रोजेक्ट की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट के रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट सेक्शन में जाकर परियोजना का नाम या रजिस्ट्रेशन नंबर डालना होता है। इसके बाद परियोजना की पूरी जानकारी सामने आ जाती है। यहां से खरीदार यह देख सकते हैं कि परियोजना कब शुरू हुई, उसकी तय समय सीमा क्या है और उसके खिलाफ कितनी शिकायतें दर्ज हैं।

जरूरत पड़ने पर खरीदार यूपी रेरा हेल्प डेस्क नंबर 9151602229 और 9151642229 पर संपर्क करके भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

बढ़ते रियल एस्टेट फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में तेजी आई है। कहीं बिल्डर पैसा लेकर गायब हो जाते हैं तो कहीं विवादित जमीन बेच दी जाती है। कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए निवेश कर देते हैं और बाद में आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। इसी को देखते हुए यूपी रेरा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सतर्कता और दस्तावेजों की सही जांच से बड़ी ठगी से बचा जा सकता है।

संपत्ति खरीदने से पहले जल्दबाजी नहीं, समझदारी जरूरी

घर या जमीन खरीदना भावनात्मक फैसला जरूर होता है, लेकिन इसमें कानूनी और आर्थिक सावधानी सबसे ज्यादा जरूरी है। आकर्षक ऑफर, सस्ते दाम या जल्दी बुकिंग के दबाव में आकर फैसला लेना नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि खरीदार पांच जरूरी बिंदुओं खतौनी जांच, पैन कार्ड, रेरा रजिस्ट्रेशन, वैध दस्तावेज और कानूनी रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच कर लेता है, तो वह बड़ी ठगी और भविष्य की परेशानियों से बच सकता है।

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