
Bihar News: अशोकधाम मंदिर में बिजली का तार गिरने की अफवाह से भगदड़, 7 श्रद्धालुओं की मौत; 12 से ज्यादा घायल
Bihar News: बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे श्रद्धालुओं पर बिजली का तार गिरने की अफवाह से अचानक भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों को इलाके के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, एक प्रत्यक्षदर्शी ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। घायलों को तुरंत लखीसराय सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है।
पुलिस ने बताया हादसे में जान गंवाने वाले चार मृतकों की पहचान हो गई है। पुलिस के अनुसार, चार मृतक महिलाओं की पहचान 55 वर्षीय हेमलता, ललिता देवी, निवासी हलसी, 50 वर्षीय रिंकू देवी निवासी मुंगेर और 44 वर्षीय मनमाला देवी निवासी बड़हिया के रूप में हुई है।
अफवाह से घबराए लोग
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि घटना के वक्त मंदिर परिसर में भारी भीड़ जमा थी। श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए कतार में लगे हुए थे। इसी दौरान बिजली का तार गिरने की अफवाह से लोग घबराकर भागने लगे, जिससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। कई महिलाएं भीड़ में दब गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
पौने सात बजे हुआ हादसा
घटना के बारे में जानकारी देते हुए लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सावन का तीसरा सोमवार होने के करण प्रशासन ने मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजाम किए थे। प्रशासन की टीम तड़के 3:30 बजे से ही घटनास्थल पर मौजूद थे और सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित थीं, लेकिन दो ट्रेनों के रुकने से भारी भीड़ मंदिर परिसर तक पहुंच गई थी और मंदिर में पहले से ही भीड़ मौजूद थी। इसी दौरान अप्रत्याशित भगदड़ मच गई।
उन्होंने बताया कि सुबह 6:40-45 के करीब भीड़ बढ़ने से एक तरफ (खेत की तरफ) बैरिकेडिंग टूट गई, जिससे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। उन्होंने बताया कि तुरंत 10-15 लोगों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
सीएम ने जताया दुख
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अशोकधाम मंदिर भगदड़ की घटना पर दुख जताया था। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘लखीसराय के अशोकधाम की घटना अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है। हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से मन व्यथित है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ‘ उन्होंने प्रशासन को घायलों का त्वरित इलाज के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं। साथ ही भगदड़ में मृतकों के परिवार वालों के लिए सम्राट चौधरी ने मृत परिजनों के आश्रितो को 4-4 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। लखीसराय के अशोकधाम की घटना अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है।
हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से मन व्यथित है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। घायलों के समुचित एवं त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति…
लखीसराय के अशोकधाम की घटना अत्यंत दुःखद एवं हृदयविदारक है।
हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु की खबर से मन व्यथित है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
घायलों के समुचित एवं त्वरित इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) August 17, 2026
प्रशासन पर लापवाही का आरोप
मोकामा से अशोकधाम मंदिर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी विनोद कुमार ने प्रशासन की घोर लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पत्नी भीड़ में दब गईं और एक बेटी अभी-भी लापता है।

उन्होंने बताया कि प्रवेश द्वार पर, जहां बांस की बैरिकेडिंग लगी थी वहां लगभग 100 लोग बाहर से जबरदस्ती घुसने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने भीड़ को धकेला, जिससे कई लोग गिर गए और उन पर चढ़कर अंदर घुसने लगे। वहां कोई प्रशासन नहीं था, कोई देखभाल नहीं थी। उन्होंने ये भी बताया कि प्रवेश का स्थान ढलान वाला था और धक्का-मुक्की के कारण बांस टूट गए, जिससे लोग नीचे गिर गए।
आपको बता दें कि लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर (इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर) की स्थापना 7 अप्रैल 1977 को हुई, जब स्थानीय युवक गिल्ली-डंडा खेलते हुए जमीन के अंदर विशाल काले पत्थर का शिवलिंग खोज निकाला था। उसी स्थान पर मंदिर बना और युवक के नाम पर इसे अशोकधाम कहा गया, जबकि 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया।
इसकी सबसे बड़ी खासियत देश के सबसे विशाल काले पत्थर के शिवलिंगों में से एक होना है जो सावन मास और महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है तथा बिहार का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।
