
SIR Raw: SIR विवाद के बीच प्रियंका गांधी का CEC ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला, ‘देशद्रोह का मुकदमा’ लगाने की मांग
SIR Raw: वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर चुनावी प्रक्रिया में जानबूझकर गड़बड़ी की गई और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ करना देश के खिलाफ अपराध है। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर भी आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की और कहा कि अगर किसी पद पर बैठे व्यक्ति ने गैरकानूनी काम किया है तो उसे कानूनी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
‘CEC पर भी होना चाहिए आपराधिक मुकदमा’
प्रियंका गांधी ने कहा कि जो भी व्यक्ति चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़ करता है, वह देश के साथ विश्वासघात कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनका साफ रुख है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ और करीब 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ आपराधिक काम है।
प्रियंका ने यह भी सवाल उठाया कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कोई गैरकानूनी काम किया है तो उन्हें कानूनी संरक्षण क्यों मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि अगर CEC को कथित अनियमितताओं की जानकारी थी और उनके सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने भी इस बारे में उन्हें बताया था, फिर भी उन्होंने कार्रवाई नहीं की, तो उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
SIR को लेकर बढ़ा विवाद
प्रियंका गांधी का यह बयान चुनाव आयोग की मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी रोल से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज कराईं। इन आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर क्या कहा?
वहीं चुनाव आयोग ने अपने कामकाज को लेकर सामने आई इन रिपोर्टों पर अलग पक्ष रखा है। आयोग की ओर से कहा गया कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं।
चुनाव आयोग ने कथित आंतरिक मतभेदों से जुड़े दावों को खारिज करते हुए कहा कि SIR समेत उसके फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे। यानी एक तरफ रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कई बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों में तीनों सदस्यों की मंजूरी रही है।
