
Bay of Bengal US Naval Exercise: ईरान संकट के बीच दक्षिण एशिया पर अमेरिकी फोकस, बंगाल की खाड़ी में होगा मेगा नेवल एक्सरसाइज
Bay of Bengal US Naval Exercise: पश्चिम एशिया और ईरान संकट के बीच दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका ने अब दक्षिण एशिया की ओर अपना रुख कर लिया है। भारत के पूर्वी सीमावर्ती क्षेत्र से सटे बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना एक बहुत बड़ा सैन्य अभ्यास आयोजित करने जा रही है। वाशिंगटन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आगामी नवंबर में बांग्लादेश के समुद्री तटों के निकट एक बहुराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास का आयोजन किया जाएगा। इस पूरे नौसैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बांग्लादेश की हथियारों के लिए चीन पर निर्भरता को कम करना और क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना है।
‘ऑपरेशन कैरेट’ और अमेरिकी पेसिफिक फ्लीट की सक्रियता
ढाका से मिले रणनीतिक संकेतों के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल नौसैन्य अभ्यास ‘ऑपरेशन अफ्लोट रेडीनेस एंड ट्रेनिंग’ (CARAT) को बांग्लादेश और म्यांमार के समुद्री तटों से दूर आयोजित किया जाएगा। इसमें अमेरिकी नौसेना के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, बांग्लादेश और श्रीलंका के युद्धपोत हिस्सा लेंगे। अमेरिकी पेसिफिक फ्लीट के प्रमुख एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर ने हाल ही में ढाका पहुंचकर बांग्लादेशी नेतृत्व के साथ इस रणनीतिक रोडमैप की समीक्षा की है।
असम सीमा के करीब थल सेना का ‘टाइगर लाइटनिंग 2026’
समुद्र में होने वाले इस बड़े आयोजन से ठीक पहले, दोनों देशों की थल सेनाओं के बीच 19 जुलाई से 31 जुलाई 2026 के मध्य ‘टाइगर लाइटनिंग 2026’ नामक पखवाड़े भर चलने वाला संयुक्त जंगल युद्धाभ्यास पूरा हुआ है। बांग्लादेश के सिलहट स्थित जलालाबाद छावनी में आयोजित इस अभ्यास में बांग्लादेशी सेना की पैरा कमांडो ब्रिगेड और अमेरिकी पैसिफिक कमांड के जवानों ने हिस्सा लिया। भारत की असम सीमा के बेहद नजदीक हुए इस युद्धाभ्यास में जंगल में काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन और विशेष सैन्य रणनीतियों पर काम किया गया।
रक्षा समझौता और एडवांस्ड अमेरिकी हथियारों की पेशकश
अमेरिका और बांग्लादेश के बीच ‘जनरल सिक्योरिटी ऑफ मिलिट्री इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट’ (GSOMIA) को अंतिम रूप देने पर तेजी से चर्चा चल रही है। इस समझौते के लागू होने से गोपनीय सैन्य खुफिया जानकारी साझा करने का एक कानूनी ढांचा तैयार होगा। इसके तुरंत बाद वाशिंगटन ढाका को उन्नत सैन्य उपकरण बेचने का मार्ग प्रशस्त करेगा। अमेरिका ने बांग्लादेश को एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, टीपीवाई-4 एयर डिफेंस रडार और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देने की पेशकश की है, ताकि उसकी चीनी हथियारों पर 70-80 प्रतिशत की निर्भरता को समाप्त किया जा सके।
अमेरिकी युद्धपोतों को मिलेगा लॉजिस्टिक सपोर्ट का अधिकार
सैन्य खरीद के साथ-साथ दोनों देश ‘एक्विजिशन एंड क्रॉस-सर्विसिंग एग्रीमेंट’ (ACSA) नाम के एक और महत्वपूर्ण समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य लड़ाकू विमानों को ईंधन भरने, रखरखाव और मरम्मत के लिए बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाहों और हवाई अड्डों का उपयोग करने का अधिकार मिल जाएगा। इससे बंगाल की खाड़ी के विशाल समुद्री क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई और निगरानी रखना अमेरिका के लिए बेहद आसान हो जाएगा।
‘पैक्स सिलिका’ आर्थिक सुरक्षा ढांचा और भारत का रुख
अमेरिका केवल सैन्य क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी बांग्लादेश को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है। वाशिंगटन ने ढाका को ‘पैक्स सिलिका’ नामक आर्थिक सुरक्षा ढांचे में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। इस पहल का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से चीन के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करना है। भारत पहले से ही इस रणनीतिक समूह का पूर्णकालिक सदस्य है, इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार समन्वय बना हुआ है।
दक्षिण एशिया के नए शक्ति संतुलन का संदेश
बंगाल की खाड़ी में अमेरिका की इस अभूतपूर्व सैन्य सक्रियता से क्षेत्र का राजनीतिक वातावरण पूरी तरह बदल गया है। जहां एक ओर बांग्लादेश अमेरिका के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक संबंधों को नए आयाम दे रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आने वाले नवंबर में होने वाला नौसैन्य अभ्यास यह साफ संदेश देगा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
