
Prashant Kishor Slams Samrat Choudhary: Prashant Kishor का सम्राट चौधरी पर बड़ा हमला, बोले- मुद्दा व्यक्ति नहीं, बिहार के भविष्य का है
Prashant Kishor Slams Samrat Choudhary: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के 30 साल पुराने मजबूत गढ़ को ध्वस्त करने के बाद जन सुराज पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर के तेवर और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। बांकीपुर में मिली ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद आजतक को दिए एक खास साक्षात्कार में प्रशांत किशोर ने राज्य के नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। जब उनसे पूछा गया कि आखिर मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर उन्हें क्या आपत्ति है, तो पीके ने स्पष्ट किया कि उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे बिहार के भविष्य और उसके नेतृत्व का है।
‘कैमरे पर भाई बोलते हैं, लेकिन बात योग्यता की है’
प्रशांत किशोर ने बातचीत में खुलासा किया कि सम्राट चौधरी से उनका कोई निजी विरोध नहीं है। उन्होंने कहा, “सम्राट चौधरी तो हमें कैमरे के सामने भाई कहते हैं और चुनाव जीतने के बाद कल भी उन्होंने बधाई दी है। लेकिन असली मुद्दा यह है कि बिहार जैसे राज्य की कमान आखिर किस छवि के व्यक्ति को दी जानी चाहिए?” पीके ने सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता, कथित आपराधिक पृष्ठभूमि और फर्जी डिग्री से जुड़े विवादों को गिनाते हुए सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बिहार का प्रतिनिधित्व ऐसा व्यक्ति करेगा जो 7वीं फेल हो, अपनी पढ़ाई के बारे में गलत जानकारी देता हो और हत्या के आरोपों में जेल की सजा काट चुका हो?
कुशवाहा समाज का अपमान या ‘जंगल राज’ का नया चेहरा?
सामाजिक समीकरणों का हवाला देकर मुख्यमंत्री बनाए जाने के तर्कों को खारिज करते हुए जन सुराज प्रमुख ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को कुशवाहा समाज से ही राज्य का मुखिया चुनना था, तो इस समुदाय में एक से बढ़कर एक शिक्षित, योग्य और निष्कलंक नेता मौजूद हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर एक दागदार छवि वाले व्यक्ति को ही आगे क्यों किया गया? पीके के अनुसार, जिस ‘जंगल राज’ के खिलाफ भाजपा ने सालों तक जनता से वोट हासिल किए, उसी दौर के आपराधिक बैकग्राउंड वाले नेता को अब अपनी पार्टी का झंडा थमाकर सत्ता सौंप देना बिहार के मतदाताओं के साथ सरासर धोखा है।
पुराने दिनों की याद दिलाकर साधा निशाना
सम्राट चौधरी को ‘जंगल राज’ का प्रतीक बताते हुए प्रशांत किशोर ने पुराने वाकयों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब सम्राट चौधरी भाजपा में शामिल हुए थे, तब उनके समर्थन में सबसे पहला बयान लालू यादव के करीबी साधु यादव का आया था। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि जब लालू प्रसाद यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे, उस दौर में पटना के बोरिंग रोड इलाके में सम्राट चौधरी की क्या भूमिका और गतिविधियां थीं, यह बात वहां के पुराने पत्रकार अच्छी तरह जानते हैं।
‘हाफ एनकाउंटर नहीं, शिक्षा और रोजगार पर हो बात’
मुख्यमंत्री के हालिया बयानों और कार्यशैली की समीक्षा करते हुए पीके ने कहा कि पिछले 3 महीनों के कार्यकाल में शासन की भाषा बेहद निम्न स्तर पर पहुंच गई है। राज्य के मुखिया को ‘हाफ एनकाउंटर, फुल एनकाउंटर, गमछा देखकर गोली मारो या जात देखकर गोली मारो’ जैसे हिंसक जुमले शोभा नहीं देते। उन्होंने कहा कि बिहार को एक ऐसे नेतृत्व की दरकार है जो प्राथमिक शिक्षा के सुधार, उच्च शिक्षा के स्तर, स्थानीय रोजगार और पलायन रोकने जैसे मूलभूत मुद्दों पर विजन पेश करे। उन्होंने साफ किया कि उनका यह संघर्ष केवल एक नेता के खिलाफ नहीं, बल्कि बिहार में एक पारदर्शी और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए है।
