Chandigarh Building Collapse: 54 साल पुरानी इमारत भरभराकर गिरी, मेरठ के 2 लोगों की मौत

Chandigarh Building Collapse: 54 साल पुरानी इमारत भरभराकर गिरी, मेरठ के 2 लोगों की मौत

Chandigarh Building Collapse: चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। करीब 54 साल पुरानी दो मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में मलबे के नीचे दबने से उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने करीब छह घंटे तक लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

मेरठ के दो लोगों की गई जान

इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी तरुण जैन (45) और तरुण कौशिश (48) के रूप में हुई है। दोनों कथित तौर पर काम के सिलसिले में इमारत में मौजूद थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई।

वहीं, कुलदीप सिंह, कुलबीर सिंह, उमेश, राहुल और अजीत को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। सभी घायलों का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

शाम 4:20 बजे हुआ हादसा, तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू

जानकारी के अनुसार, हादसा शनिवार शाम करीब 4:20 बजे हुआ। इमारत गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस, सिविल डिफेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बाद में सेना और एनडीआरएफ को भी बुलाया गया, जिन्होंने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया।

रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले जेसीबी मशीन की सहायता से इमारत की भारी छत और लेंटर को बेहद सावधानी से हटाया ताकि मलबे के नीचे फंसे लोगों तक हवा पहुंचती रहे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

NDRF ने बताया कैसे चला ऑपरेशन

एनडीआरएफ अधिकारी संजीव कोहली ने बताया कि राहत अभियान के अंतिम चरण में दो लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। इनमें एक व्यक्ति बेहोश था, जबकि दूसरा होश में था और रेस्क्यू टीम से बातचीत भी कर रहा था।

उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई अत्यंत सावधानी के साथ की गई ताकि मलबा हटाते समय कोई और हिस्सा न गिरे और बचाव कार्य प्रभावित न हो।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- ‘भूकंप जैसा महसूस हुआ’

मलबे से जीवित निकले रमेश कुमार ने हादसे का आंखों देखा हाल बताया। उनके अनुसार, हादसे के समय इमारत के अंदर लगभग 20 से 25 लोग मौजूद थे। अचानक जोरदार झटका महसूस हुआ, मानो भूकंप आया हो। कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत धराशायी हो गई और सभी लोग मलबे के नीचे दब गए।

उन्होंने बताया कि आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और राहत एजेंसियों को सूचना दी, जिसके बाद बचाव कार्य शुरू किया गया।

पुरानी इमारत और वर्षा बनी हादसे का कारण?

इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एमपीएस चावला के अनुसार, यह इमारत वर्ष 1972 में बनाई गई थी और हाल के दिनों में यहां स्क्रैप का कारोबार शुरू हुआ था। जानकारी के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले ही इस परिसर को किराए पर दिया गया था।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण इमारत में सीलन आ गई थी। पहले से जर्जर हो चुकी संरचना बारिश के कारण और कमजोर हो गई, जिससे वह अचानक ढह गई। हालांकि वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

NDRF को देर से जानकारी मिलने पर उठे सवाल

हादसे के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि एनडीआरएफ को सूचना देने में देरी क्यों हुई। पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें तो तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं, लेकिन एनडीआरएफ को लगभग ढाई घंटे बाद, शाम करीब पौने सात बजे सूचना दी गई।

इस देरी को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने बताया कि हादसे के समय इमारत में लोग मौजूद थे और यह पुरानी बिल्डिंग होने के कारण यहां मरम्मत और रेनोवेशन का काम भी चल रहा था। हालांकि एनडीआरएफ को देर से सूचना देने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।

अब जर्जर इमारतों का होगा सर्वे

इस हादसे के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर की सभी पुरानी और असुरक्षित इमारतों का सर्वे कराने का फैसला लिया है। एस्टेट ऑफिस और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की टीमें घटनास्थल का निरीक्षण करेंगी और इमारत गिरने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच करेंगी।

गौरतलब है कि मानसून शुरू होने के बाद चंडीगढ़ में यह दो दिनों के भीतर दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले 3 जुलाई को बारिश के दौरान सीसीईटी के पुराने मल्टीपर्पज हॉल की छत गिर गई थी। उस भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित कर खाली करा दिया गया था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई थी।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने शहर की जर्जर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके नियमित निरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।

 

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