India-US Trade Deal: भारत ने रखी ‘Sunset Clause’ की शर्त, अंतिम चरण में पहुंची व्यापार समझौता वार्ता

India-US Trade Deal: भारत ने रखी ‘Sunset Clause’ की शर्त, अंतिम चरण में पहुंची व्यापार समझौता वार्ता

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Agreement) वार्ता अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यहां दोनों देशों के अधिकारियों के हालिया बयानों से संकेत मिले हैं कि अगले महीने तक इस समझौते पर सहमति बन सकती है। हालांकि अंतिम सहमति से पहले भारत ने इस डील में एक अहम शर्त जोड़ने की मांग की है, जिसे सनसेट क्लॉज (Sunset Clause) कहा जाता है।

यही वजह है कि यह प्रावधान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। तो क्या है ये सनसेट क्लॉज और भारत को क्या होगा इससे फायदा? आइए इसकी पड़ताल करते हैं।

क्या होता है सनसेट क्लॉज?

असल में व्यापार समझौतों में सनसेट क्लॉज एक ऐसी शर्त होती है, जिसके तहत किसी समझौते की एक तय समय सीमा निर्धारित कर दी जाती है। उस अवधि के समाप्त होने के बाद समझौता स्वतः खत्म हो जाता है, यदि दोनों पक्ष उसे आगे बढ़ाने या नवीनीकरण कराने के लिए सहमत न हों।

आसान शब्दों में कहें तो सनसेट क्लॉज किसी भी समझौते की एक तरह की एक्सपायरी डेट होती है। यदि दोनों देश चाहें तो निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले इसे आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन ऐसा न होने पर समझौता अपने आप समाप्त हो जाता है।

ज्यादातर समझौतों में नहीं होता ये प्रावधान

आमतौर पर अधिकांश व्यापार समझौतों में सनसेट क्लॉज शामिल नहीं किया जाता है। ऐसे मामलों में समझौता तब तक लागू रहता है, जब तक दोनों पक्षों में से कोई एक इसे समाप्त करने की पहल न करे।

भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) किए हैं, लेकिन उनमें इस प्रकार का कोई प्रावधान शामिल नहीं किया गया था। इसके बावजूद अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील में भारत इस शर्त को शामिल करना चाहता है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।

देश क्यों शामिल करते हैं सनसेट क्लॉज?

गौरतलब हो कि, वैश्विक व्यापार (Global Trade) का माहौल लगातार बदल रहा है। कभी टैरिफ (Tariff) बढ़ा दिए जाते हैं तो कभी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) व्यापारिक समीकरण बदल देते हैं। इसके अलावा अलग-अलग देशों की सरकारें समय-समय पर अपनी औद्योगिक नीतियों (Industrial Policies) और व्यापार नीतियों (Trade Policies) में बदलाव करती रहती हैं।

ऐसे अनिश्चित माहौल में कोई भी देश लंबे समय तक एक जैसी शर्तों से बंधे रहना नहीं चाहता। इसी वजह से कई देश व्यापारिक समझौतों में सनसेट क्लॉज का उपयोग करते हैं, ताकि भविष्य में बदलती परिस्थितियों के अनुसार समझौते की समीक्षा की जा सके।

यूरोपीय संघ और अमेरिका की डील में भी शामिल है यह शर्त

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी हाल ही में यूरोपीय संघ (European Union) और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भी सनसेट क्लॉज को शामिल किया गया था। इस प्रावधान के तहत दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता 31 दिसंबर 2029 को समाप्त हो जाएगा, यदि उससे पहले इसे आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनती है।

इस अवधि के दौरान यूरोपीय संघ अपने विनिर्माण (Manufacturing), कृषि (Agriculture) और छोटे व्यवसायों (Small Businesses) से जुड़े क्षेत्रों की समीक्षा करेगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि अमेरिका के साथ जारी व्यापार समझौता भविष्य में भी उसके हित में है या नहीं।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रावधान?

अब भारत और अमेरिका के बीच फिलहाल अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। अमेरिका अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए शर्तों पर काम कर रहा है, वहीं भारत भी केवल बाजार तक आसान पहुंच हासिल करने पर ही ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि भविष्य के जोखिमों को भी ध्यान में रख रहा है।

भारत की चिंता यह है कि यदि आज किसी क्षेत्र में अमेरिका को कोई विशेष छूट दी जाती है तो वह भविष्य में भी लागू रहेगी। ऐसे में यदि बाद में अमेरिका अपने व्यापारिक ढांचे में बदलाव करता है या नए टैरिफ लागू करता है तो इसका असर भारतीय हितों पर पड़ सकता है। सनसेट क्लॉज शामिल होने की स्थिति में भारत के पास भविष्य में समझौते की समीक्षा करने और अपने आर्थिक हितों के अनुसार फैसला लेने का अवसर रहेगा।

क्यों बरती जा रही है अतिरिक्त सावधानी?

भारत ने अन्य देशों के साथ हुए समझौतों में भले ही इस तरह की शर्त नहीं जोड़ी हो, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत में अतिरिक्त सतर्कता दिखाई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका की लगातार बदलती व्यापारिक नीतियां हैं।

फिलहाल अमेरिकी अधिकारी सेक्शन 301 (Section 301) से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा कर रहे हैं। इसके जरिए दुनिया के कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावना बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो कई देशों के निर्यात पर 10 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार इंडोनेशिया (Indonesia) और पाकिस्तान (Pakistan) जैसे देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगने की संभावना जताई गई है, जबकि भारत पर 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इन देशों पर जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।

बदलते वैश्विक माहौल में भारत की रणनीति

अब भारत की ओर से सनसेट क्लॉज को शामिल करने की मांग को बदलते वैश्विक व्यापारिक माहौल के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह प्रावधान भारत को भविष्य में अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों की समीक्षा करने का अवसर देगा और बदलती परिस्थितियों के अनुसार नई रणनीति बनाने में मदद करेगा।

यही वजह है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम दौर में यह शर्त सबसे अहम मुद्दों में से एक बनकर उभरी है और दोनों देशों के बीच जारी बातचीत में इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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