RBI Polymer Notes: प्लास्टिक के नोटों का होगा ट्रायल, क्या ATM मशीनों में भी करना पड़ेगा बदलाव?

RBI Polymer Notes: प्लास्टिक के नोटों का होगा ट्रायल, क्या ATM मशीनों में भी करना पड़ेगा बदलाव?

RBI Polymer Notes: अब जल्द ही भारत में करेंसी का स्वरूप आने वाले समय में बदलाव की ओर बढ़ रहा है। आपकी जेब में कागज के नोटों के साथ अब पॉलीमर यानी प्लास्टिक जैसे नोट भी अपनी जगह बनायेंगे। जिनका ट्रायल होने जा रहा है। RBI की नोट छापने वाली कंपनी BRBNMPL ने इसके लिए जुलाई में ग्लोबल टेंडर जारी किया है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्लास्टिक के नोट बाजार में आते हैं तो क्या पुराने नोट बंद होंगे और क्या ATM मशीनों को भी बदलना पड़ेगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Limited (BRBNMPL) ने 17 जुलाई 2026 को पॉलीमर बैंकनोट के लिए इस्तेमाल होने वाली खास सामग्री की खरीद के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है। इस प्रक्रिया के तहत करीब 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट शीट्स की खरीद की जानी है। इसका उद्देश्य पॉलीमर नोटों के निर्माण और परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ना है।

₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू हो सकता है ट्रायल

पॉलीमर नोटों के ट्रायल के लिए फिलहाल ₹10 और ₹20 के मूल्यवर्ग को चुने जाने की बात सामने आई है। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ₹10 और ₹20 के पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल (परीक्षण) किया जाएगा। दोनों मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ (कुल 200 करोड़) प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। पुराने कागजी नोट बंद नहीं होंगे, वे चालू रहेंगे। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में इन नोटों को वास्तविक इस्तेमाल की परिस्थितियों में परखा जा सकता है। इस परीक्षण का मकसद सिर्फ यह देखना नहीं होगा कि प्लास्टिक जैसा नोट कैसा दिखाई देता है। इसमें यह भी जांचा जाएगा कि नोट लगातार हाथ बदलने, मोड़ने, गिनने, मशीनों में चलने, नमी और अलग-अलग मौसम की परिस्थितियों में कितने समय तक टिकता है।

पुराने कागज के नोट होंगे बंद या नहीं?

प्लास्टिक के नोटों की खबर सामने आने के बाद सबसे ज्यादा भ्रम इस बात को लेकर है कि क्या मौजूदा कागजी नोटों की जगह पॉलीमर नोट ले लेंगे। फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। सरकार ने साफ किया है कि पॉलीमर नोटों का ट्रायल कागजी नोटों को तुरंत हटाने की योजना नहीं है। अगर ट्रायल सफल रहता है और आगे इन्हें जारी किया भी जाता है तो कुछ मूल्यवर्गों में दोनों तरह के नोट एक साथ चल सकते हैं।

इसका मतलब है कि लोगों के पास मौजूद मौजूदा ₹10 और ₹20 के कागजी नोट अचानक बेकार नहीं हो जाएंगे। जब तक RBI किसी नोट को वापस लेने या उसकी वैधता खत्म करने की आधिकारिक घोषणा नहीं करता, तब तक उससे जुड़े किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

क्या प्लास्टिक के नोट ATM से निकल पाएंगे?

अब सबसे बड़ा सवाल ATM को लेकर लोगों के बीच उठ रहा है। पॉलीमर नोट आने पर ATM से पैसे निकालने की प्रक्रिया सामान्य रूप से ही रहेगी। ग्राहक को ATM में कोई अलग प्रक्रिया अपनाने की जरूरत नहीं होगी। मशीन के अंदर नोटों को रखने, पहचानने और बाहर निकालने वाला सिस्टम नए नोट के आकार और तकनीकी विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए।

यही वह जगह है जहां कुछ ATM मशीनों में बदलाव या तकनीकी सेटिंग की जरूरत पड़ सकती है। अलग-अलग देशों में पॉलीमर नोट शुरू किए जाने के दौरान cash-handling और ATM मशीनों की compatibility की जांच की गई है। भारत में भी ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि मौजूदा ATM और दूसरी कैश मशीनें पॉलीमर नोटों को आसानी से पहचान और संभाल पाती हैं या नहीं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि देशभर के सभी ATM को बदलकर नई मशीनें लगाई जाएंगी। अधिक संभावना यह है कि जरूरत पड़ने पर कुछ मशीनों में सॉफ्टवेयर calibration, sensor adjustment या अन्य तकनीकी बदलाव किए जाएं। फिलहाल RBI की ओर से सभी ATM बदलने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

कागज के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं पॉलीमर नोट

पॉलीमर नोटों को लेकर RBI की दिलचस्पी की सबसे बड़ी वजह उनकी टिकाऊ क्षमता है। छोटे मूल्यवर्ग के कागजी नोट रोजाना बड़ी संख्या में लोगों के हाथों से गुजरते हैं। लगातार इस्तेमाल के कारण ये जल्दी गंदे, फटे और खराब हो जाते हैं। इसके बाद इन्हें वापस लेकर नए नोट जारी करने पड़ते हैं। पॉलीमर नोट सामान्य परिस्थितियों में कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक चल सकते हैं। पानी और नमी से भी इनके खराब होने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है। इससे लंबे समय में नोटों की छपाई और उन्हें बार-बार बदलने की जरूरत कम हो सकती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में अलग-अलग मूल्यवर्ग के लिए पॉलीमर बैंकनोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

नकली नोट बनाना भी हो सकता है मुश्किल

पॉलीमर नोटों का एक दूसरा बड़ा फायदा उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। इनमें पारदर्शी विंडो और कई तरह के विशेष सुरक्षा फीचर लगाए जा सकते हैं। इन फीचर्स की वजह से नकली नोट तैयार करना सामान्य कागजी नोट की तुलना में मुश्किल हो सकता है। भारत में नकली नोटों की समस्या को देखते हुए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि पॉलीमर नोटों की नकली कॉपी बनाई ही नहीं जा सकती। सुरक्षा तकनीक जितनी मजबूत होगी, नकली नोट तैयार करने की चुनौती उतनी बढ़ सकती है।

भारतीय गर्मी और मौसम में होगी असली परीक्षा

पॉलीमर नोटों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। भारत का मौसम कई देशों की तुलना में काफी अलग है। गर्मियों में कई इलाकों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जबकि मानसून के दौरान नमी और पानी की समस्या रहती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पॉलीमर नोट लंबे समय तक गर्मी और नमी के बीच इस्तेमाल होने के बाद किस स्थिति में रहते हैं। पॉलीमर नोटों के साथ अधिक तापमान में मुड़ने या आपस में चिपकने जैसी संभावित समस्याओं का भी आकलन करना जरूरी होगा। यही कारण है कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले फील्ड ट्रायल को अहम माना जा रहा है।

नोट छापने का खर्च भी हो सकता है कम

पॉलीमर नोटों की लंबी उम्र का सीधा असर करेंसी मैनेजमेंट की लागत पर पड़ सकता है। अगर कोई नोट ज्यादा समय तक इस्तेमाल में रहता है तो उसे बार-बार बदलने और नए नोट छापने की जरूरत कम होती है। इससे लंबे समय में सरकार और RBI के खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है।

शुरुआत में पॉलीमर नोटों के निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष सामग्री और नई प्रक्रिया की लागत अधिक हो सकती है। इसलिए अंतिम फैसला सिर्फ नोट की उम्र देखकर नहीं होगा। RBI को इसकी पूरी लागत, सुरक्षा, मशीनों की कंपैटिबिलिटी और पर्यावरणीय असर जैसे पहलुओं को भी देखना होगा।

अभी ATM बदलने की खबर पर न करें भरोसा

फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि भारत में पॉलीमर नोटों का मामला अभी ट्रायल के चरण में है। इसका मतलब यह नहीं है कि जल्द ही सभी कागजी नोट वापस ले लिए जाएंगे या देशभर के ATM बदल दिए जाएंगे। पहले पॉलीमर नोटों को सीमित स्तर पर तैयार कर उनकी वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जाएगी।

अगर परीक्षण के नतीजे सकारात्मक रहते हैं, तभी आगे बड़े स्तर पर पॉलीमर नोट जारी करने पर फैसला हो सकता है। फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक प्लास्टिक करेंसी के लॉन्च के साथ ATM और दूसरी कैश मशीनों की तकनीकी क्षमता को भी नए नोटों के मुताबिक तैयार किया जाएगा। इसलिए अभी आम लोगों को अपने पास मौजूद ₹10 और ₹20 के कागजी नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

यानी प्लास्टिक के नोट भारत में आने की तैयारी जरूर शुरू हो गई है, लेकिन पहले प्लास्टिक नोटों का फील्ड ट्रायल किया जाएगा। वहीं ATM मशीनों को बदलने का भी कोई तत्काल आदेश नहीं है। आने वाले महीनों में ट्रायल के नतीजे ही तय करेंगे कि पॉलीमर करेंसी भारत की रोजमर्रा की नकदी व्यवस्था का हिस्सा बनेगी या नहीं।

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