
Saharanpur News: किसानों ने दिल्ली-देहरादून हाईवे से जुड़े रास्ते के लिए प्रशासन से लगाई गुहार !
Saharanpur News: सहारनपुर तहसील के ग्राम कपासी के किसानों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी समस्या से अवगत कराया है।
किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि ग्राम कपासी में स्थित है और खेतों तक पहुंचने के लिए लंबे समय से एक रास्ता इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसी रास्ते से किसान ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य कृषि यंत्र लेकर अपने खेतों तक पहुंचते हैं।
किसानों का आरोप है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की ओर से उनके खेतों तक जाने वाला रास्ता बंद किया जा रहा है। किसानों का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
किसानों के मुताबिक, वर्ष 2016 में पंचकूला-देहरादून बाईपास के निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इस दौरान किसानों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाली चकरोड भी हाईवे की जमीन में चली गई। किसानों का दावा है कि इसके बाद उनके पास खेतों तक आने-जाने के लिए कोई स्थायी रास्ता नहीं बचा।
किसानों का आरोप है कि वर्ष 2023 में NHAI की ओर से उनके खेतों के सामने बैरिकेडिंग कर दी गई थी। किसानों के विरोध के बाद मौके पर पहुंचे SDM ने कथित तौर पर आश्वासन दिया था कि जब तक सर्विस रोड उपलब्ध नहीं होती, तब तक अस्थायी कट खुले रहेंगे।
हालांकि, किसानों का कहना है कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
किसानों ने प्रशासन को दिए प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि रास्ते के विवाद और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर कुछ किसानों ने खेतों पर आत्महत्या का प्रयास तक किया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
किसानों के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को NHAI के अधिकारियों ने खाद्य विभाग और पुलिस प्रशासन के साथ उनके ढाबों और खेतों पर पहुंचकर दबाव बनाया। किसानों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी गई।
किसानों का सवाल है कि जब उनके अस्थायी कट से करीब दो किलोमीटर पहले एक अन्य कट खुला हुआ है, तो उनके खेतों तक पहुंचने वाले अस्थायी रास्ते को बंद क्यों किया जा रहा है?
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनके खेतों तक आने-जाने का रास्ता बंद न किया जाए, स्थायी सर्विस रोड उपलब्ध कराई जाए और NHAI कर्मचारियों द्वारा कथित उत्पीड़न की शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।
अब किसानों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और किसानों की खेतों तक पहुंच की समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।
