
Sonia Gandhi Book Controversy: आखिर क्यों विवादों में घिरी सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’?
Sonia Gandhi Book Controversy: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सोशल मीडिया की दुनिया में कदम रखते ही अपनी आने वाली किताब को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बुधवार को उन्होंने इंस्टाग्राम (Instagram) पर अपनी पहली पोस्ट साझा की और अपनी पहली किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) की झलक दिखाई। सोनिया गांधी ने इस किताब को प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की तलाश से जुड़ी कहानी बताया है। हालांकि, यह किताब अपनी कहानी के साथ-साथ प्रकाशन को लेकर हुए विवाद के कारण भी सुर्खियों में है। पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (Penguin Random House India) के साथ इसके प्रकाशन को लेकर सहमति नहीं बन सकी और अब हार्परकॉलिन्स इंडिया (HarperCollins India) इसे प्रकाशित करने जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर इस किताब को लेकर विवाद क्यों हुआ और इसके प्रकाशन में देरी की वजह क्या रही?
सोनिया गांधी ने पहली इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या कहा?
सोनिया गांधी ने अपनी पहली इंस्टाग्राम पोस्ट में किताब का परिचय देते हुए पाठकों के साथ इस पल को साझा करने पर खुशी जताई। उन्होंने लिखा कि वह सभी के साथ अपनी किताब की पहली झलक साझा करके आभारी हैं और इसे पाठकों तक पहुंचाने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) को उन्होंने प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनापन खोजने की कहानी बताया। इस किताब के जरिए पाठकों को उनके निजी जीवन, भारत से जुड़ाव और उन सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक देखा है।
क्या है ‘बिलॉन्गिंग’ किताब और इसमें क्या लिखा है?
सोनिया गांधी की यह किताब एक संस्मरण (Memoir) है, जिसमें उनके जीवन के निजी अनुभवों और राजनीतिक सफर को जगह दी गई है। इसमें युद्ध के बाद के इटली में उनके बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) से विवाह और गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक की यात्रा शामिल है।
किताब में परिवार से जुड़ी त्रासदियों, राजनीति में उनके प्रवेश और कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व से जुड़े अनुभवों को भी देखने का मौका मिल सकता है। सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहने के बावजूद अपने निजी जीवन पर बहुत कम विस्तार से सार्वजनिक रूप से बात की है। इसलिए इस संस्मरण को उनके जीवन और भारत की राजनीति को उनके नजरिए से समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पेंगुइन रैंडम हाउस के साथ क्यों बिगड़ी बात?
सोनिया गांधी की किताब को लेकर विवाद उस समय सामने आया, जब खबरें आईं कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया अब इसे भारत में प्रकाशित नहीं करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांडुलिपि (Manuscript) के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव और कटौती को लेकर प्रकाशक तथा सोनिया गांधी की टीम के बीच सहमति नहीं बन सकी।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जिन मुद्दों पर आपत्ति की बात सामने आई, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत-चीन संबंध (India-China Relations), सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की स्थिति जैसे विषय शामिल थे। बताया गया कि सोनिया गांधी की टीम इन हिस्सों में बदलाव या उन्हें हटाने के सुझावों से सहमत नहीं थी।
हालांकि, इस विवाद पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बाहरी दबाव के आरोपों को खारिज किया था। प्रकाशक का कहना था कि पांडुलिपि पर सामान्य संपादकीय प्रक्रिया के तहत चर्चा हुई और दोनों पक्ष एक मुद्दे पर सहमति तक नहीं पहुंच सके। कंपनी ने गोपनीयता का हवाला देते हुए विवाद के विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए। इसलिए किताब के कुछ हिस्सों को हटाने के लिए कथित दबाव बनाए जाने की बात कांग्रेस नेताओं के आरोपों और मीडिया रिपोर्ट्स के रूप में ही सामने आई है।
कांग्रेस नेताओं ने लगाए सेंसरशिप के आरोप
किताब के प्रकाशन को लेकर विवाद सामने आने के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) समेत कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की किताब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और चीन से जुड़े संदर्भ हटवाने के लिए प्रकाशक पर दबाव डाला गया।
कांग्रेस नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) से जुड़ा मामला बताते हुए आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सोनिया गांधी अपने जीवन और राजनीतिक अनुभवों को संस्मरण के रूप में सामने रख रही हैं, इसलिए उन अनुभवों से जुड़े तथ्यों को हटाने की मांग नहीं की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया कि किताब प्रकाशित नहीं करने का फैसला किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं लिया गया। प्रकाशक के मुताबिक, लेखक की टीम के साथ बातचीत में कई बिंदुओं पर चर्चा हुई, लेकिन अंत में एक मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। इस तरह किताब का विवाद राजनीतिक आरोपों, संपादकीय स्वतंत्रता और प्रकाशक के अधिकारों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
अब कौन प्रकाशित करेगा सोनिया गांधी की किताब?
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साथ सहमति नहीं बनने के बाद अब हार्परकॉलिन्स इंडिया सोनिया गांधी की किताब को भारत में प्रकाशित करेगा। प्रकाशक ने घोषणा की है कि ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर 2026 को भारत में प्रकाशित होगी। किताब के अंतरराष्ट्रीय संस्करण को अमेरिका में अल्फ्रेड ए. नॉफ (Alfred A. Knopf) और ब्रिटेन में हार्परकॉलिन्स के विलियम कॉलिन्स (William Collins) इम्प्रिंट के तहत प्रकाशित किया जाना है।
हार्परकॉलिन्स ने इसे हमारे समय के बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक बताते हुए कहा कि किताब प्यार, पहचान, कर्तव्य और अपनेपन की एक निजी कहानी है। प्रकाशक के अनुसार, यह भारत की यात्रा को एक ऐसे व्यक्ति के नजरिए से समझने का अवसर देगी, जिसने कई दशकों तक देश के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों को करीब से देखा है।
किताब के प्रकाशन में देरी क्यों हुई?
सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन में देरी की चर्चा का मुख्य कारण भारत में इसके प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साथ बातचीत का टूटना रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पांडुलिपि में संपादकीय बदलावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच करीब दो महीने तक बातचीत चली। कुछ सुझावों पर सहमति बनी, लेकिन एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर मतभेद दूर नहीं हो सके। इसके बाद सोनिया गांधी की टीम ने पेंगुइन के साथ भारत में प्रकाशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
इसके बाद नए प्रकाशक के रूप में हार्परकॉलिन्स इंडिया के साथ समझौता हुआ। प्रकाशक बदलने की प्रक्रिया और पहले हुए मतभेदों के कारण किताब की भारतीय प्रकाशन व्यवस्था चर्चा में रही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार किताब की अंतरराष्ट्रीय रिलीज की तारीख 10 नवंबर 2026 निर्धारित है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किताब की वैश्विक रिलीज भी स्थगित हुई है; विवाद मुख्य रूप से भारत में इसके प्रकाशन को लेकर रहा।
सोनिया गांधी की पहली इंस्टाग्राम पोस्ट ने उनकी किताब को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब पाठकों की नजर 10 नवंबर को होने वाले प्रकाशन पर है। किताब में उनके जीवन, परिवार और राजनीतिक अनुभवों के अलावा ऐसे कौन से विवरण सामने आते हैं, जो पहले सार्वजनिक नहीं हुए हैं, यह किताब जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
