
Barabanki News: 60 वर्षों पुराने मंदिर मार्ग पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों में भारी आक्रोश; प्रशासन पर उठे सवाल
लोकेशन- बाराबंकी
संवाददाता- रानू सिंह
Barabanki News: बाराबंकी में श्री नारूबीर बाबा सेवा संस्थान, ग्राम भोगौली तीर्थ, तहसील फतेहपुर, जनपद बाराबंकी से जुड़ा एक मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदिर तक जाने वाला लगभग 60 वर्षों पुराना सार्वजनिक रास्ता गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा अपने खेत में मिलाकर जोत दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता वर्षों से मंदिर तक आने-जाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने दबंगई दिखाते हुए पूरे रास्ते पर कब्जा कर लिया और उसे अपने खेत में मिला लिया।
इस मामले को लेकर श्री नारूबीर बाबा सेवा संस्थान की ओर से संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भी दी गई है। शिकायत पत्र में रास्ते को तत्काल खाली कराकर श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के आवागमन को बहाल करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि मामले की जानकारी चौकी प्रभारी को भी दी गई। उनका कहना है कि चौकी प्रभारी ने बताया कि उन्होंने फिलहाल काम रुकवा दिया है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक रास्ते को कब्जामुक्त कराने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जब इस संबंध में ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी देने से बचते हुए बातचीत समाप्त कर दी।
ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार यह कहते हैं कि किसी भी श्रद्धालु के मंदिर जाने के रास्ते में बाधा नहीं आने दी जाएगी, तब भी इस मामले में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
श्री नारूबीर बाबा सेवा संस्थान के अध्यक्ष राकेश कुमार मौर्य ने बताया कि इस मामले को लेकर ग्रामीण एकजुट हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शिकायत के दौरान संस्थान से जुड़े देशराज, सुधीर, राजकुमार, हरीश, कंदूलाल, राकेश कुमार सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे और सभी ने मंदिर के पारंपरिक मार्ग को कब्जामुक्त कराने की मांग की।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मंदिर के पारंपरिक रास्ते को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
