Delhi Bus Gangrape Forensic Report: फॉरेंसिक रिपोर्ट में आरोपियों के फिंगरप्रिंट मैच, जांच को मिली बड़ी मजबूती

Delhi Bus Gangrape Forensic Report: फॉरेंसिक रिपोर्ट में आरोपियों के फिंगरप्रिंट मैच, जांच को मिली बड़ी मजबूती

Delhi Bus Gangrape Forensic Report: देश की राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में हुए सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में पुलिस को जांच का सबसे बड़ा और मजबूत आधार मिल गया है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जांच में बस के भीतर से पीड़िता के साथ-साथ दोनों आरोपियों के फिंगरप्रिंट पूरी तरह मैच हो गए हैं। इस वैज्ञानिक प्रमाण ने घटना के समय बस के भीतर आरोपियों की मौजूदगी पर मुहर लगा दी है, जिससे अब दोषियों का बचना लगभग नामुमकिन हो गया है। पुलिस इस ठोस सबूत के आधार पर अदालत में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

सीटों, स्टीयरिंग और कपड़ों से मिले सबूत

जांच टीमों ने बस के हर उस हिस्से को बारीकी से खंगाला था जहां वारदात के दौरान आरोपियों की मौजूदगी की आशंका थी। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में बस की सीटों, दरवाजे के हैंडल और स्टीयरिंग व्हील से लिए गए फिंगरप्रिंट्स की पुष्टि हो चुकी है। ये निशान पीड़िता और गिरफ्तार किए गए ड्राइवर कुलदीप व कंडक्टर संदीप के उंगलियों के निशानों से पूरी तरह मेल खाते हैं। इसके अलावा पुलिस ने वारदात के वक्त आरोपियों द्वारा पहने गए कपड़ों को भी जब्त कर लिया था। अब फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला से डीएनए (DNA) रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है, जिससे केस को अदालत में और अधिक अकाट्य बनाया जा सके।

मदद के नाम पर दिया धोखा

यह दर्दनाक वारदात 4 अगस्त की रात की है, जब उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा नोएडा स्थित अपने रिश्तेदार के घर जाने के लिए निकली थी। भारी बारिश के बीच वह गलती से ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंच गई। अपने गंतव्य से करीब 25 किलोमीटर दूर अकेली खड़ी छात्रा वाहन का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान वहां एक स्लीपर बस आकर रुकी। बस के कंडक्टर ने मदद का झूठा भरोसा देते हुए कहा कि बस नोएडा सेक्टर-63 जा रही है। मासूम बच्ची उस पर विश्वास करके बस में सवार हो गई, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं था कि वह एक खौफनाक जाल में फंसने जा रही है।

मरम्मत के बहाने निकली थी बस

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वह बस किसी नियमित व्यावसायिक रूट पर नहीं चल रही थी। ट्रैवल कंपनी के अनुसार बस में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे मरम्मत के लिए वर्कशॉप भेजा गया था। शाम को ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप बस को वर्कशॉप से निकालकर परी चौक पहुंचे थे। छात्रा को बैठाने के बाद आरोपियों ने बस को तय रास्ते पर ले जाने के बजाय दिल्ली की दिशा में मोड़ दिया। लगभग 47 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर छात्रा के साथ चलती बस में हैवानियत की गई और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। आखिरकार आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। वैज्ञानिक साक्ष्यों के मजबूत होने से अब पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।

 

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