
Gir National Park Lions Death News 2026: एशियाई शेरों पर मंडराया खतरा,सासन गिर में 7 शेरों की मौत से बढ़ी चिंता
Gir National Park Lions Death News 2026: जंगल सफारी के शौकीन लोगों की पहली पसंद गुजरात का गिर नेशनल पार्क यानी सासन गिर मुख्य रूप से एशियाई शेरों के दुनिया के एकमात्र प्राकृतिक आवास के रूप में प्रसिद्ध है। अफ्रीका के बाहर यह एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ बब्बर शेर अपने प्राकृतिक परिवेश में स्वतंत्र रूप से विचरण करते है। लेकिन इन दिनों गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान एक बार फिर चिंता के केंद्र में है।
एशियाई शेरों का दुनिया का आखिरी प्राकृतिक बसेरा माने जाने वाले इस जंगल में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान 7 शेरों की मौत ने वन विभाग और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती जांच में इन मौतों के पीछे किसी संक्रामक वायरस की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि पूरे गिर क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सैकड़ों वनकर्मी लगातार निगरानी में जुटे हुए हैं।
क्यों खास है गिर राष्ट्रीय उद्यान?
गिर राष्ट्रीय उद्यान केवल गुजरात या भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि पृथ्वी पर जंगली अवस्था में एशियाई शेर अब सिर्फ यहीं पाए जाते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रामक बीमारी का फैलना पूरी प्रजाति के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक एशियाई शेर कभी पश्चिम एशिया से लेकर भारत तक बड़े भू भाग में पाए जाते थे, लेकिन शिकार और जंगलों के घटते क्षेत्र के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती गई। लंबे संरक्षण प्रयासों के बाद गिर में इनकी आबादी बढ़ी। लेकिन अब भी पूरी प्रजाति का एक ही क्षेत्र में सीमित होना सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है।
CDV वायरस पर गहराया सबसे ज्यादा शक
वन विभाग के अनुसार मृत पाए गए शेरों में वायरल संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। शुरुआती शक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस यानी CDV पर केंद्रित है। यह वही वायरस है जिसने पहले अफ्रीका में शेरों और चीतों की बड़ी आबादी को प्रभावित किया था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि जांच के लिए सभी नमूने प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि फिलहाल हर स्तर पर सावधानी बरती जा रही है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
क्या होता है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
विशेषज्ञों के मुताबिक CDV केवल कुत्तों तक सीमित बीमारी नहीं है। यह बड़ी बिल्लियों सहित कई जंगली जानवरों को संक्रमित कर सकता है। संक्रमित जानवरों में बुखार, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी और न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें देखने को मिल सकती हैं। यही वजह है कि गिर में मिले मामलों को बेहद गंभीर माना जा रहा है। यह वायरस पहले भी अफ्रीका में वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। इसी कारण भारत में भी वन्यजीव विशेषज्ञ इसकी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं
बेबेसिया संक्रमण की भी जांच जारी
वन विभाग एक अन्य संभावित कारण बेबेसिया संक्रमण की भी जांच कर रहा है। यह एक परजीवी संक्रमण होता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी एक कारण पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन हालात को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
17 शेर क्वारंटाइन, 8 में संक्रमण की पुष्टि
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 17 अन्य शेरों को एहतियातन क्वारंटाइन किया गया है। इनमें से 8 में संक्रमण की पुष्टि होने की बात सामने आई है। इन शेरों को अलग निगरानी में रखा गया है ताकि बीमारी अन्य जानवरों तक न फैले। वर्तमान में 12 पशु चिकित्सकों की विशेष टीम दिन-रात प्रभावित शेरों की निगरानी और इलाज में जुटी हुई है। शेरों की गतिविधियों, खानपान और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरकार ने बढ़ाई निगरानी
गुजरात सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने खुद उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि गिर गढ़ाड़ा और बाबरिया रेंज के 10 किलोमीटर दायरे में मौजूद सभी शेरों की विशेष निगरानी की जा रही है। फिलहाल नए संक्रमित मामलों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सतर्कता लगातार जारी है। वन विभाग अमरेली और भावनगर जिलों के उन इलाकों में भी रोजाना स्वास्थ्य जांच कर रहा है जहां शेरों की आवाजाही रहती है।
वन विभाग ने बढ़ाई तैनाती
बब्बर शेरों के अस्तित्व पर मंडराते गभीर संकट को देखते हुए सरकार ने गिर में लगभग 250 वनकर्मियों को तैनात किया है। इसके अलावा जामनगर, सूरत, राजकोट, कच्छ और जूनागढ़ से अतिरिक्त अधिकारी और कर्मचारी बुलाए गए हैं। जूनागढ़ पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञ भी इस अभियान में शामिल हो चुके हैं। संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
एक बार फिर उठी आबादी बसाने की मांग
इस गंभीर संकट का सामना कर रही बब्बर शेरों की प्रजाति को संरक्षित करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। वन्यजीव विशेषज्ञ लंबे समय से यह सुझाव देते रहे हैं कि एशियाई शेरों की दूसरी सुरक्षित आबादी भी विकसित की जानी चाहिए ताकि किसी महामारी, प्राकृतिक आपदा या बड़े संक्रमण की स्थिति में पूरी प्रजाति खतरे में न पड़े। गिर में सामने आए मौजूदा हालात ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी शेर एक ही क्षेत्र में रहेंगे तो किसी भी संक्रामक बीमारी का असर बहुत बड़ा हो सकता है।
पूरे देश की नजर गिर नेशनल पार्क पर
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को नियंत्रित करना और बाकी शेरों को सुरक्षित रखना है। पूरे देश की नजर अब गिर से आने वाली लैब रिपोर्ट और वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।अब आखिरी उम्मीद इस संक्रमण पर तत्परता से रोक लगाने पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते हालात पर काबू पा लिया गया तो यह एशियाई शेरों के लिए बड़ी राहत होगी, लेकिन अगर संक्रमण फैलता है तो यह वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
Watch | The Gujarat Forest Department carries out vaccination and de-ticking treatment of Asiatic lions in Gir amid the death of lion cubs in the region. pic.twitter.com/Qvi53vm75n
