
Akhilesh Yadav targeted Congress: तमिलनाडु चुनाव के बाद INDIA गठबंधन में दरार, कांग्रेस ने छोड़ा DMK का साथ
Akhilesh Yadav targeted Congress: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने दक्षिण भारत की सियासत में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। दशकों पुराने रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) का हाथ छोड़ दिया है। चुनाव परिणाम आने के बाद बदले हुए समीकरणों के बीच कांग्रेस के इस फैसले ने ‘इंडिया गठबंधन’ के भीतर की रार को सार्वजनिक कर दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कांग्रेस के इस कदम पर नाराजगी जाहिर करते हुए इशारों-इशारों में अपनी सहयोगी पार्टी को खरी-खोटी सुनाई है।
तमिलनाडु में सत्ता की चाबी अब तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के पास है, जिसने 108 सीटें हासिल कर राज्य की राजनीति में नई इबारत लिख दी है। वहीं, एमके स्टालिन की DMK महज 59 सीटों पर सिमट गई है। इस हार के बाद कांग्रेस ने स्टालिन का साथ छोड़कर विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का फैसला किया है। कभी राहुल गांधी को अपना छोटा भाई बताने वाले एमके स्टालिन के लिए कांग्रेस का यह रुख किसी बड़े झटके से कम नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि राज्य में संवैधानिक संकट को टालने और सरकार बनाने के लिए विजय को समर्थन देना जरूरी है।
‘हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें’अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा की है, जिसे सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए संदेश माना जा रहा है। उन्होंने लिखा कि हम वह नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ देते हैं। हालांकि अखिलेश ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि चुनाव हारते ही साथी बदल लेना गठबंधन की राजनीति के लिए सही नहीं है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले अखिलेश ने खुद को इंडिया गठबंधन का एक वफादार साथी बताते हुए कांग्रेस की अवसरवादी राजनीति पर सवाल खड़े किए हैं।
क्षेत्रीय क्षत्रपों का गिरता ग्राफ और विपक्षी एकता पर सवाल
तमिलनाडु ही नहीं, पश्चिम बंगाल में भी इंडिया गठबंधन के बड़े चेहरों को नुकसान उठाना पड़ा है। ममता बनर्जी की पार्टी बंगाल में अब केवल 80 सीटों तक सीमित रह गई है। क्षेत्रीय दलों की इस कमजोरी का असर गठबंधन की मजबूती पर दिखने लगा है। तमिलनाडु में DMK और AIADMK जैसे धुर विरोधियों के बीच किसी समझौते की गुंजाइश न के बराबर है, ऐसे में कांग्रेस का विजय की पार्टी के साथ जाना स्टालिन को हाशिए पर धकेलने जैसा है।
सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव के बयान पर छिड़ी बहस
अखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। जहां कुछ लोग इसे अखिलेश की वफादारी बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अखिलेश यादव ने जिसका भी साथ दिया, उसकी किस्मत ही बदल गई। सोशल मीडिया पर लोग बिहार में तेजस्वी यादव और उत्तर प्रदेश में मायावती के साथ उनके पिछले गठबंधनों का उदाहरण देते हुए कटाक्ष कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अगर अखिलेश ने इसी तरह की सक्रियता जनता के बीच दिखाई होती, तो शायद उनकी अपनी सीटों का आंकड़ा बेहतर होता।
