UP Transport Rule 2026: यूपी में नहीं चलेगी ‘डग्गामारी’, बाहरी राज्यों की बसों पर परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन

UP Transport Rule 2026: यूपी में नहीं चलेगी ‘डग्गामारी’, बाहरी राज्यों की बसों पर परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन

UP Transport Rule 2026: गहराता सड़क सुरक्षा मुद्दा, राजस्व नुकसान और नियामकीय चुनौतियों का सामना कर रहे उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चल रहे प्राइवेट लग्जरी बसों के ‘डग्गामारी मॉडल’ पर अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। परिवहन विभाग ने ऑल इंडिया परमिट से जुड़ा नियम बदल दिया है, जिसके बाद नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, दमन-दीव, गुजरात, राजस्थान या अन्य राज्यों में पंजीकृत बसें मनमाने तरीके से यूपी में यात्रियों को नहीं बैठा सकेंगी। अब ऐसी बसों को अपने पंजीकरण वाले राज्य से ही यात्री लेकर निकलना होगा और अधिकतम 60 दिनों के भीतर उन्हीं यात्रियों को वापस लेकर अपने राज्य पहुंचना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पंजीकरण, टैक्स चोरी और अनधिकृत बस संचालन पर रोक लगेगी। उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों में पंजीकृत प्राइवेट लग्जरी बसों के संचालन को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। ऑल इंडिया परमिट के नियमों में बदलाव के बाद अब ऐसी बसों के लिए अपने पंजीकरण वाले राज्य में नियमित रूप से वापसी दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

इससे वर्षों से चल रहे उस नेटवर्क पर असर पड़ने की संभावना है, जिसके तहत कई बस ऑपरेटर कम टैक्स या आसान पंजीकरण वाले राज्यों में वाहन रजिस्टर कराकर उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में व्यावसायिक संचालन कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लंबे समय से ऐसी लग्जरी बसें संचालित हो रही हैं, जिनका पंजीकरण नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, दमन-दीव, गुजरात, राजस्थान या मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में है।

इन बसों के पास ऑल इंडिया परमिट होने के कारण वे कानूनी रूप से एक राज्य से दूसरे राज्य तक यात्रियों को ले जाने का अधिकार रखती हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि कई बसें इस व्यवस्था का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर यात्री ढोने और नियमित रूट संचालन के लिए कर रही थीं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब स्पष्ट कर दिया गया है कि जिस राज्य में बस का पंजीकरण है, वहीं से यात्री लेकर उसकी यात्रा शुरू होगी। बस दूसरे राज्यों में जा सकती है, लेकिन उसे अधिकतम 60 दिनों के भीतर उन्हीं यात्रियों को लेकर अपने पंजीकरण वाले राज्य में वापस लौटना होगा। यदि बस नागालैंड या अरुणाचल प्रदेश में पंजीकृत है तो उसे निर्धारित अवधि में वहीं अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

परिवहन विभाग की जांच में यह बात सामने आई कि कुछ राज्यों में वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होने और टैक्स का बोझ कम होने के कारण बस ऑपरेटर वहां वाहन रजिस्टर करा लेते हैं। इसके बाद वे उन बसों को उत्तर प्रदेश और अन्य बड़े राज्यों में नियमित रूप से चलाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में ऐसे वाहनों का भी पंजीकरण हो गया जो निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरी तरह पूरा नहीं करते थे। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

ऑनलाइन टिकटिंग से बढ़ी चुनौती

परिवहन विभाग के सामने एक बड़ी समस्या ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म भी हैं। कई निजी बस ऑपरेटर ऑनलाइन टिकट बेचकर रास्ते में स्थानीय यात्रियों को बैठा लेते हैं। चूंकि टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर परिवहन विभाग का सीधा नियंत्रण नहीं है, इसलिए ऐसे मामलों को पकड़ना आसान नहीं होता।

क्या कहते हैं अधिकारी

यात्री कर अधिकारियों का कहना है कि चेकिंग के दौरान नियम उल्लंघन मिलने पर अधिकतर मामलों में केवल 10 हजार रुपये का चालान काटा जा सकता है। यह राशि वर्षों से नहीं बढ़ी है, जबकि कई अन्य राज्यों में जुर्माना कहीं अधिक है। कम जुर्माने के कारण कई ऑपरेटर इसे व्यवसायिक जोखिम मानकर संचालन जारी रखते हैं।

यूपी में चालान कम, दूसरे राज्यों में सख्ती ज्यादा

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में अवैध या अनियमित बस संचालन के खिलाफ कार्रवाई की प्रभावशीलता कम जुर्माने के कारण भी प्रभावित होती है। जहां कुछ राज्यों में ऐसे मामलों में 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है, वहीं यूपी में कई मामलों में अभी भी 10 हजार रुपये की सीमा प्रभावी है। यही वजह है कि परिवहन विभाग अब केवल चालान पर निर्भर रहने के बजाय संचालन के मूल ढांचे को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रहा है।

यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन बस ऑपरेटरों पर पड़ेगा जो दूसरे राज्यों में पंजीकरण कराकर यूपी में स्थायी संचालन कर रहे थे। शुरुआती दौर में कुछ रूटों पर बसों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, लेकिन विभाग का दावा है कि इससे वैध परमिट वाले ऑपरेटरों को फायदा मिलेगा और प्रतिस्पर्धा अधिक पारदर्शी बनेगी।
यात्रियों के लिए इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि नियमों के तहत संचालित बसों की निगरानी बेहतर होगी और सुरक्षा मानकों के पालन की संभावना बढ़ेगी।

तीन दिन का विशेष अभियान चलेगा

परिवहन विभाग ने अनधिकृत तरीके से संचालित हो रही प्राइवेट लग्जरी बसों के खिलाफ विशेष अभियान की तैयारी भी शुरू कर दी है। संभागीय परिवहन अधिकारियों के नेतृत्व में कई जिलों की संयुक्त टीमें जांच अभियान चलाएंगी।अधिकारियों के अनुसार, पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान के दौरान बसों के परमिट, पंजीकरण, टैक्स भुगतान, फिटनेस और संचालन पैटर्न की जांच की जाएगी।

क्या है ऑल इंडिया परमिट?

ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट या ऑल इंडिया परमिट का उद्देश्य वाहनों को विभिन्न राज्यों के बीच वैध रूप से संचालन की अनुमति देना है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से लंबी दूरी की यात्रा और पर्यटन सेवाओं के लिए बनाई गई थी। लेकिन कई मामलों में इसका उपयोग स्थानीय व्यावसायिक संचालन के लिए होने लगा, जिसके चलते राज्यों को राजस्व नुकसान और नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
नई व्यवस्था का मकसद इसी खामी को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि ऑल इंडिया परमिट का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो, जिसके लिए यह बनाया गया था।

 

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