Lucknow News: लखनऊ में मुंबई के डॉक्टर दंपती से 12 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार !

Lucknow News: लखनऊ में मुंबई के डॉक्टर दंपती से 12 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी, मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार !

Lucknow News:  मुंबई के डॉक्टर दंपती ने लखनऊ में 12 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। सिद्धिविनायक हॉस्पिटल की डॉक्टर ज्योति सिंह और उनके पति देवेंद्र जगदीश सिंह ने आरआर इंफ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों पर डायलिसिस सेंटर और अस्पताल खोलने के नाम पर निवेश कराने और बाद में रकम का कथित तौर पर निजी इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। डॉक्टर दंपती ने मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

अस्पताल और डायलिसिस सेंटर के नाम पर निवेश का आरोप

डॉक्टर दंपती का आरोप है कि उन्हें लखनऊ में अस्पताल और डायलिसिस सेंटर खोलने की योजना बताकर निवेश के लिए तैयार किया गया। इसके बाद उनसे 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निवेश कराई गई।

आरोप है कि निवेश के लिए दी गई रकम का इस्तेमाल प्रस्तावित स्वास्थ्य परियोजना में करने के बजाय अन्य निजी खर्चों में किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

दस्तावेजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर कराने का आरोप

महिला डॉक्टर ज्योति सिंह ने आरोप लगाया है कि उनसे कई दस्तावेजों पर पूरी जानकारी दिए बिना हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले को लेकर विरोध करने पर उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।

डॉक्टर दंपती के मुताबिक, उन्होंने लखनऊ में आशियाना पुलिस चौकी में भी शिकायत की है। उनका आरोप है कि मामले में राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाने की कोशिश की गई। इसी सिलसिले में महाराष्ट्र में भी शिकायत किए जाने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग

डॉक्टर दंपती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निवेश के नाम पर उनसे बड़ी रकम ली गई और अब उन्हें अपनी रकम वापस पाने के लिए न्याय की गुहार लगानी पड़ रही है।

फिलहाल यह मामला कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि निवेश की रकम कहां और किस उद्देश्य से इस्तेमाल की गई तथा आरोपों में कितनी सच्चाई है।

लोकेशन-   लखनऊ
संवाददाता –  सुभाष चंद्र

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